नगर निगम का कमरा नंबर दो सात: फाइल हो वजनी तो काम पक्का, हल्की होने पर फाइल गुम

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होशियारपुर नगर निगम में ज्यादातर कामकाज जहां नार्मल चल रहा है वहीं एक कमरा ऐसा भी है जहां पर भ्रष्टाचार का बोलबाला इस कद्र है कि गत दिवस विजीलैंस द्वारा कार्यवाही किए जाने के बावजूद भी अधिकतर कर्मचारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे। हम पहले ही आपको बता चुके हैं कि किस प्रकार भ्रष्टाचार को जन्म दिया जाता है और कैसे लोगों की जेबों पर डाका मारने का काम निर्विध्न जारी है। कमरा नंबर दो सात के नाम से मशहूर इस कमरे का आलम यह है कि अगर तो फाइल वजनी है तो काम पक्का, अगर फाइल हल्की है तो वह गुम भी हो सकती है तथा आपके द्वारा चक्कर पे चक्कर लगाए जाने पर भी काम नहीं होगा। हम आपसे यह तो पहले भी सांझा कर चुके हैं कि नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा तथा किस प्रकार एक के दूसरा व दूसरे के बाद तीसरा ऑबजैक्शन लगाकर लोगों की लूट की जा रही है। जिसकी ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिली थी जब ऑबजैक्शन से तंग आए एक व्यक्ति ने विजीलैंस से शिकायत की और एक इंस्पैक्टर रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस कार्यवाही के बाद भी काली भेड़ों पर कोई असर नहीं हो रहा।

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अब सामने आए ताजा मामले में एक व्यक्ति द्वारा 2014 में एनओसी लेने के लिए फाइल जमा करवाई थी। लेकिन दुख की बात है कि व्यक्ति द्वारा चक्कर पे चक्कर लगाए जाने के बाद भी पिछले 6 सालों से उसका काम नहीं हुआ और अब उसे यह कह दिया गया कि उसकी फाइल गुम हो चुकी है, जबकि पता चला है कि उसके बाद जितनों ने भी एनओसी के लिए अप्लाई किया उनमें से अधिकतर के काम हो चुके हैं। मामला जब आला अधिकारियों के ध्यान में पहुंचा तो उन्होंने तुरंत कार्यवाही करते हुए उक्त व्यक्ति को एनओसी जारी करने के निर्देश दे डाले। मगर, अफसोस की बात तो यह है कि अब काम कैसे हो, फाइल मिले तो काम हो। अब क्या हुआ, हुआ ये कि अब उसकी फाइल दफ्तर द्वारा पुन: बनवाई जा रही है ताकि उसे एनओसी दी जा सके। यह भी पता चला है कि यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं तथा जांच हो तो कई मामले सामने आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

व्यक्ति ने एनओसी लेने के लिए बनती सरकारी फीस भी जमा करवा दी थी, बावजूद इसके उसे एनओसी क्यों नहीं जारी की गई, इसके बारे में तो संबंधित अधिकारी व कर्मी ही कुछ बता पाएंगे, लेकिन इतना जरुरी है कि चर्चाओं पर गौर किया जाए तो उक्त कमरे में काम करवाने के लिए फाइल का बजनी होना बहुत जरुरी होता है।
दबी जुबान में कुछेक अधिकारियों व कर्मियों ने बताया कि उक्त कमरे में क्या-क्या चलता है इसकी जानकारी लगभग प्रत्येक आला अधिकारी को है और यहां तक कि इस बारे में मंत्री जी को भी अवगत करवाया जा चुका है। परन्तु, फिर भी सुधार होने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही। जिसकी चलते इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार द्वारा पहले ही फीसों में इतनी बढ़ोतरी की जा चुकी है कि आम लोगों के लिए बिल व फीस भरनी मुश्किल होती जा रही है। ऊपर से भ्रष्टाचार है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि पिछले व इस मामले के प्रकाश में आने के बाद आला अधिकारी क्या रुख अख्तियार करते हैं या फिर मंत्री जी को ही आंखें लाल करने को विवश होना पड़ेगा? क्या कौन-कौन सा अधिकारी या कर्मी इस भ्रष्टाचार में शामिल है? क्यों मेरे पीछे पड़ जाते हो। पहले ही बता चुका हूं छोटा सा पत्रकार हूं, पत्रकारिता से परिवार का पेट पाल रहा हूं। मेरे पेट पे लात मत मारो। कुछ तो समझा करो। इस हमाम में सभी नंगे हैं। जय राम जी की।

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