आज के दिन आजाद हुआ था राजौरी, जब देश में थी दीवाली, वे खेल रहे थे खून की होली

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जम्मू/राजौरी (द स्टैलर न्यूज़), अनिल भारद्वाज। आखिरकार स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी रंग लाई। पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था। जो हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को रास नहीं आया। उसने कबाइलियों को भेजकर राज्य पर कब्जा करना का असफल प्रयास किया। सेना ने कबाइलियों को घाटी से खदेड़ा तो वे राजौरी में घुस आए और तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 12 अप्रैल 1948 की आधी रात तक राजौरी पर कहर टूटता रहा। लेकिन 13 अप्रैल 1948 का सूरज खुशियां लेकर आया। इस दिन भारतीय सेना ने राजौरी को कबाइलियों से मुक्त करा अपने कब्जे में ले लिया। इसलिए राजौरी के लोग 13 अप्रैल को विजय दिवस के रूप में मनाते हैं। 

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26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने राज्य का विलय भारत के साथ कर दिया। इसके ठीक एक दिन बाद 27 अक्टूबर 1947 को पाक ने कबाइलियों को जम्मू-कश्मीर में भेजकर कब्जा करने का प्रयास किया। कबाइलियों ने राजौरी में आते ही लोगों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया। महिलाओं की अस्मत लूटी गई। 11 नवंबर 1947 को देश में दीपावली का पर्व मनाया जा रहा था उस समय राजौरी कबाइलियों की जुल्म में जल रहा था। पूरा राजौरी आग की लपटों में घिरा हुआ नजर आ रहा था। इस दौरान तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। कई महिलाओं ने अपनी बेटियों के साथ जहर खा लिया तो कुछ ने कुएं में छलांग लगा दी।

भयानक मंजर याद कर कांप जाते हैं

भाजपा वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री कुलदीप राज गुप्ता निवासी राजौरी आज भी भयानक मंजर को याद कर कांप उठते है। बच्चों के रोने की आवाज आज भी सुनाई देती है। मां से बच्चे जुदा हो रहे थे उस समय राजौरी के तहसीलदार हजारी लाल थे। हमले के समय लोगों की सुरक्षा के लिए गोरखा राइफल के बीस जवान तैनात थे। पर हमारे तहसीलदार जवानों को अपने साथ लेकर रियासी भाग गए थे। उस समय आरएसएस व सिंह सभा के लोगों ने दुश्मन का डट का मुकाबला किया। 

आज भी नहीं रुकते आंसू

पूर्व एमएलसी चौधरी गुलजार कहते हैं कि बकाइलियों ने राजौरी पर बहुत कहर बरपाया। जो भी सुंदर महिला मिली उसको अपने साथ ले गए। किसी को भी नहीं छोड़ा जो मिला उसे मौत के घाट उतार दिया। उनका कहना है कि आज भी जब वह मंजर याद आता है तो आंखों से आंसू अपने आप बहने लगते हैं।

मंडी चौराहे व एएलजी सेना मैदान पर कार्यक्रम 

प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल को मंडी चौराहे पर बनाए गए शहीदी स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें सैन्य अधिकारी, धर्म गुरु, प्रशासनिक अधिकारी व आम लोग प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं। 
सोमवार शाम तक शहीदी स्मारक को सजने सबरने का काम सेना जवानों द्वारा किया जा रहा था। 

मौलवी गुलाम उल दीन भी किए जाते हैं याद

मौलवी गुलाम उल दीन ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाक सेना की हर गतिविधि की सूचना भारतीय सेना को दी और सेना के जवानों ने समय रहते अपनी सभी तैयारियों को पूरा करके दुश्मन का डट कर मुकाबला किया। उस दौरान सेना ने मौलवी को अशोक चक्र से सम्मानित किया था। प्रत्येक वर्ष राजौरी दिवस के दिन मौलवी गुलाम उल दीन को भी याद किया जाता है और उनके द्वारा किए गए इस कार्य को लोगों को बताया जाता है।

माली बी को दी जाएगी श्रद्धांजलि

जांबाज महिला माली बी ने 1971 के युद्ध से पहले ही सेना के अधिकारियों को इस बात की जानकारी दे दी थी कि पाक सेना किसी भी समय आक्रमण कर सकती है। जिसके बाद सेना के जवानों ने सीमा पर सुरक्षा को पुख्ता किया और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद माली बी को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल के दिन माली बी को श्रद्धांजलि दी जाती है।

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