टैम्पो पर टैम्पोः कभी सियासत में नाकाम रहा अधिकारी सियासतदानों के साथ कर रहा सियासत, झांसे में मंत्री और अपने हुए पराए

तो बात ऐसी है कि नगर निगम होशियारपुर इन दिनों सियासत का अड्डा बनी हुई नज़र आ रही है और कभी सियासत में नाकाम रहा एक अधिकारी अपना वर्चस्व व दबदबा कायम रखने के लिए सियासतदानों के साथ सियासत के ऐसे-ऐसे दांव पेंच खेल रहा है कि अच्छा खासा सियासतदान चकरा जाए। और तो और मंत्री की विशेष कृपा पात्र साहिब मंत्री को ही झांसे में लेकर कुछ ऐसा खेल, खेल रहे हैं कि अपने पराए कब हो गए और बगावत के सुर उठने लगे, पता ही नहीं चला। बेहद शातिराना तरीके से काम करने में माहिर यह अधिकारी अपने पद और पहुंच का खूब लाभ भी ले रहा है तथा अपने से काफी निम्न स्तर के एक-दो अधिकारियों पर भी इनका आशीर्वाद काफी चर्चा में बना हुआ है। क्योंकि, वह भी मंत्री की गुड बुक के ही माने जाते हैं। अब सवाल यह है कि जो गुड बुक में हों, वह ऐसा कार्य करते हैं, जिससे उनके आका की छवि बने, न कि बिगड़े। परन्तु यहां पर नंबर गेम की सियासत ने सब चौपट करके रख दिया है।

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बात यह है कि करीब दो-तीन दिन पहले स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर निगम में 25 हूटर टिप्पर डंपर पहुंचे तथा इत्तफाक की बात है कि उस दिन मंत्री जिम्पा निगम में कुछ मुद्दों को लेकर बैठक करने पहुंचे थे तथा इसी दौरान टैम्पो पहुंचने की खुशी से गदगद हुए कुछेक अधिकारियों ने नंबर गेम के चलते मौके पर चौका मारते हुए टैम्पोओं को हरी झंडी दिखाकर उनका निगम के बाहर से एक चक्कर लगवाकर पुनः निगम के भीतर खड़े कर दिए गए तथा उन्हें जनता की सेवा में नहीं भेजा गया। भेजा भी कैसे जाता, क्योंकि उनकी आरसीज़ ही नहीं बनीं तो वह सड़क पर कैसे दौड़ सकते हैं। परन्तु मंत्री के आने की खुशी व उनके सामने नंबर बनाने की गेम में फूले न समाए अधिकारियों ने बिना कागज बनवाए ही टैम्पोओं को हरी झंडी दिखाने की जल्दबाजी की। इसके बाद कुछेक लोगों द्वारा पार्षदों को उद्घाटन में न बुलाए जाने को लेकर भड़काए जाने पर जो सियासत शुरु हुई, उसने आप में बगाबत के सुरों को जन्म देने का काम किया। इसके बाद गुस्साए पार्षदों द्वारा बैठकों का दौर शुरु होते देर न लगी। सूत्रों की माने तो अधिकारी के अनुसार उन्होंने उद्घाटन के लिए नहीं कहा और उन्होंने इसका ठीकरा मेयर पर फोड़ने का प्रयास किया। जबकि बैठक हाल के बाहर जब यह व्यूरचना रची गई उस समय मेयर मंत्री के साथ थे और उन्हें भी इस बारे में कम ही जानकारी थी कि जितने टैम्पो यहां आने वाले थे वे सभी आ चुके हैं या नहीं। क्योंकि, यह कार्य अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में आता है और उनका यह फर्ज बनता था कि वह समझदारी दिखाते हुए मंत्री को बताते कि इनके कागजात नहीं बने और अभी उद्घाटन का कोई लाभ नहीं है। हरी झंडी की जल्दबाजी इतनी कि छुट्टी पर गए एक बड़े अधिकारी का भी इंतजार किया जाना जरुरी नहीं समझा गया।

मगर, जल्दबाजी के चक्कर में मंत्री और मेयर की फजीहत करवाकर न जाने अधिकारी वर्ग कौन सी सियासत खेल रहा है, इसकी जानकारी तो उन्हें ही होगी। मगर, फिलहाल शहर की सियासत में टैम्पो इतने हावी हैं कि शहर वासियों का किसी दूसरे मुद्दे की तरफ ध्यान नहीं नहीं जा रहा। ऊपर से सत्ता पक्ष से जुड़े कुछेक पार्षदों द्वारा मेयर व मंत्री से बेमुख होकर बैठकों का सिलसिला जारी होना मुद्दे को और भड़काने एवं राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म देने के लिए काफी है।

अधिकारी व उससे काफी निम्न अधिकारी का नाम तो बताते जाओ। न भाई न, वे तो पहले ही मुझे टेढी आंख से देखते हैं, मेरे में इतनी हिम्मत व ताकत कहां कि उनके पवित्र नाम अपनी जुबान पर ला सकूं। आप सभी समझदार हैं, समझ तो गए ही होंगे। अब तो वक्त बताएगा कि टैम्पो सियासत क्या रंग लाती है और इस सियासत का ऊंट किस करवट बैठता है। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।

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