बढ़ती ठंड में टैंडरों की गर्मी से माहौल गर्म, एलसीयू में रोष, टैंडर खुलने पर हो सकता है बबाल

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होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। नगर निगम की तरफ से शहर के विकास कार्यों को गति प्रदान करते हुए टैंडर लगाए जा रहे हैं ताकि शहर की सडक़ें व अन्य कार्यों को जल्द से जल्द निपटाकर जनता को राहत पहुंचाई जा सके। लेकिन टैंडर खुलने पर चुनिंदा ठेकेदारों को मात्र कुछ प्रतिशत की लैस पर कार्य दिए जाने से अन्य ठेकेदारों में रोष की भावना का संचार चरम सीमा पर है और बताया जा रहा है कि सोमवार 23 नवंबर को खुलने वाले टैंडर किसे दिए जाने हैं, यह पहले से तय है और इस संबंधी चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म है।

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भले ही ठेकेदारों ने अभी तक इनका खुलकर विरोध करना शुरु नहीं किया है, मगर चंद चहेतों को कथित मिलीभगत करके टैंडर दिए जाने का विरोध फेसबुक पर दिखना शुरु हो चुका है। जिसके चलते मामला किस हद तक गडग़ड़ है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। चर्चा है कि करीब 6 करोड़ रुपये के कार्यों के टैंडर निगम द्वारा दिए जाने हैं तथा जिन लोगों ने टैंडर डाले हैं उनके नाम अभी तक लिफाफा बंद हैं, मगर वे किन्हें जारी किए जाएंगे इसे लेकर अन्य ठेकेदारों एवं सोसायटियों में रोष की भावना है। सूत्रों की मानें तो यह पहले से ही तय है कि काम किन तीन ठेकेदारों को दिया जाना है तथा कितनी लैस पर काम जारी किए जाने हैं। द होशियारपुर लेबर एवं कंस्ट्रक्शन यूनियन के सदस्यों में अंदरखाते यह द्वंद जारी है कि वे इसका विरोध किस स्तर पर करें और कथित मिलीभगत के खेल को कैसे रोका जाए। भले ही सोमवार को टैंडर खुलने का परिणाम अभी से सभी को पता हो, लेकिन खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं है।

जबकि फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से उन्होंने अपना रोष जताना शुरु कर दिया है। यूनियन सदस्यों की माने तो कथित तौर पर चल रहे मिलीभगत के इस खेल ने चंद ठेकेदारों का ही पेठ भरा है, जबकि अन्य ठेकेदारों एवं सोसायटियों से जुड़े ठेकेदार व उनकी लेबर के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ चुकी है। उनका कहना है कि अगर यही टैंडर निष्पक्ष तौर पर जारी किए जाएं तो न केवल सरकार को लैस अधिक मिल सकती है बल्कि समस्त ठेकेदारों एवं उनकी लेबर के माध्यम से कार्य होने से सभी का भला हो सकता है। लेकिन अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण काफी समय से ऐसा ही हो रहा है कि टैंडर किसे जारी होना है और कितनी लैस पर जारी होना है यह सारा खेल पहले से ही तय कर लिया जाता है व इससे सरकार व जनता को ठगा जा रहा है।

कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है, जिसकी निष्पक्ष जांच की जानी समय की मांग है। खैर फिलहाल निगम द्वारा जारी किए जाने वाले टैंडरों को लेकर माहौल में गर्माहट बढ़ती जा रही है और अगर सोमवार को पहले से तय ठेकेदारों को टैंडर अलाट कर दिए जाते हैं तो फिर मामला गर्मा सकता है और भेद खुलने पर किस-किस का चेहरा नंगा होगा यह तो समय ही बताएगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार अभी अन्य ठेकेदार सोमवार के इंतजार में हैं व संघर्ष को भी तैयार हैं।

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