Monday, October 12, 2026
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संगरूर नकली शराब मामला: मुलजिम ‘शाही’ ब्रांड के लेबल वाली शराब की बोतलों में बेचते थे घातक ‘ मिथेनॉल’

चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। संगरूर जि़ले के कई गाँवों में 20 लोगों की जान लेने वाली नकली शराब, दरअसल मिथेनौल थी- जो कि औद्योगिक उत्पादों में इस्तेमाल किये जाने वाला एक घातक रसायन होता है। दोषियों ने यह रसायन नोएडा की एक फैक्ट्री से औद्योगिक कामों के लिए बरतने के बहाने खरीदा था। यह जानकारी उक्त मामले की जांच के लिए बनाई विशेष जांच टीम ( एस. आई. टी.) का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त डायरैक्टर जनरल आफ पुलिस ( एडीजीपी) लॉ एंड आर्डर गुरिन्दर सिंह ढिल्लों ने दी। ए. डी. जी. पी. ढिल्लों, एस. एस. पी. संगरूर- कम-एस. आई. टी. मेंबर सरताज सिंह चाहल के साथ शनिवार को यहाँ पंजाब पुलिस हैडक्वाटर ( पी. पी. एच. क्यू.) में एक प्रैस कान्फ्ऱेंस को संबोधन कर रहे थे। प्राप्त जानकारी अनुसार संगरूर पुलिस ने इस मामले में तीन अलग अलग थानों- दिढ़बा, सिटी सुनाम और चीमा में तीन अलग- अलग एफ. आई. आरज़ दर्ज करके नामज़द किये 10 दोषियों में से आठ मुलजिमों समेत दो मास्टर माईंडज़, जिनकी पहचान गुरलाल सिंह निवासी गाँव उभावाल, संगरूर और हरमनप्रीत सिंह निवासी गाँव ताईपुर के तौर पर हुई है, को गिरफ़्तार कर लिया है। दोनों मास्टरमाईंडज़ की आपराधिक पृष्टभूमि है और वह संगरूर जेल में रहते हुये एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। गिरफ़्तार किये गए अन्य छह मुलजिमों की पहचान मनप्रीत सिंह उर्फ मनी और सुखविन्दर सिंह उर्फ सुखी दोनों निवासी गाँव गुज्जरां, दिढ़बा ; सोमा कौर, राहुल उर्फ संजू और प्रदीप सिंह उर्फ बब्बी तीनों निवासी चुहवां, चीमा और अरशदीप सिंह उर्फ अरश गाँव रोगला के तौर पर हुई है। पुलिस टीमों ने इनके कब्ज़े में से 200 लीटर मिथेनौल केमिकल, शराब की खाली बोतलें और ढक्कन और नकली शराब बनाने और लेबिंलिंग करने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला अन्य सामान भी बरामद किया है। 

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एडीजीपी गुरिन्दर सिंह ढिल्लों ने बताया कि मुलजिम हरमनप्रीत अपने साथी गुरलाल के साथ मिलकर नोएडा स्थित फैक्ट्री से मिथेनौल केमिकल मंगवाता था और अपने घर में नकली शराब तैयार करके ‘शाही’ मार्का लेबल वाली शराब की बोतल में पैक करके बेचता था। मुलजिम घर में प्रिंटर का प्रयोग करके ब्रांड लेबल बना रहा था, जबकि बोतल कैंप लगाने की मशीन उसने लुधियाना से खरीदी थी। उन्होंने बताया कि यह मास्टरमाइंड नकली शराब बेचने के लिए स्थानीय व्यक्ति मनप्रीत मनी (गिरफ़्तार) की मदद लेते थे। उन्होंने बताया कि मुलजिम आधी कीमत पर नकली शराब बेचने के लिए मज़दूर वर्ग के लोगों को निशाना बनाते थे। एडीजीपी ने कहा कि पुलिस के पास इस घातक रसायन की खरीद सम्बन्धी दस्तावेज़ हैं और पुलिस की तरफ से उन फ़ैक्टरियाँ, जहाँ से दोषियों ने मिथेनौल खरीदा था, की भूमिका की जांच करने के लिए भारतीय आइपीसी की धारा 120- बी दी गई है। जि़क्रयोग्य है कि मुलजिमों ने कुल 300 लीटर मिथेनौल केमिकल खरीदा था। एडीजीपी ने कहा कि पुलिस ने तीनों ऐफआईआरज़ में आबकारी एक्ट की सख़्त धारा 61-ए की भी लगा दी है। उन्होंने कहा कि धारा 61-ए में उम्र कैद या मौत की सज़ा का प्रावधान है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच को तर्कपूर्ण निष्कर्ष पर पहुँचाने के लिए एस. आई. टी सभी पहलूओं पर बारीकी से जांच करेगी और समय पर अदालत में चालान पेश किया जायेगा। इस दौरान ऐसआईटी प्रमुख ने प्रभावित गाँवों के निवासियों से अपील की कि वह अनाधिकृत स्रोतों से खऱीदी गई शराब का सेवन करने से गुरेज़ करें। 

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