Monday, September 14, 2026
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गुरु की शरण में ही मिलता है मुक्ति का मार्ग: आचार्य चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में में रविवार के सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि परमात्मा ही अपने अंश स्वरूप आत्मा को संसार में भेजते हैं। संसार बहुत विशाल है। इसमें आत्मा कही भटक ना जाए इसलिए इश्वर सद्गुरु के रूप मे उसे एक रक्षक व मार्गदर्शक की शरण भी प्रदान करता है ताकि वह अपनी सांसारिक यात्रा को पूर्ण करके फिर प्रभु के पास चला आए। प्रभु लोक व परलोक के स्वामी होते हैं। वह भुक्ति और मुक्ति के प्रदाता है। भुक्ति का भाव है कि जो हमें संसार में जीवन व्यतीत करने के लिए चाहिये। और मुक्ति का भाव की हम इस संसार के दुख सागर से छूट कर प्रभु पास पहुंच जायें। सांसारिक वस्तुएँ तो हम कई तरह से प्राप्त कर सकते हैं। परंतु मुक्ति तो केवल गुरु की शरण मे रह कर उनकी शिक्षाओं पर चल कर ही प्राप्त हो सकती है।

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गुरुकी शरण में हमें इस लोक के सुख और परलोक के सुख दोनों मिल जाते हैं। जो आध्यात्मिक चीज हमें चाहिए वह हमें मिल जाना इसी को योग कहते हैं। गुरु से सब कुछ मिल सकता है। योग में संसार की सभी चीज आ जाती हैं। गुरु से कुछ प्राप्त करने के लिए शिष्य में श्रद्धा चाहिए। श्रद्धा ही शिष्य को गुरु के साथ जोड़ती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा से ही गुरु से ज्ञान मिलता है। भगवान तो गुरु देते हैं लेकिन अगर श्रद्धा नहीं होगी, संशय होगा तो जीवन का नाश होना निश्चित है। गुरु कदम कदम पर शिष्य की रक्षा करते हैं। गीता में भगवान कहते हैं कि अर्जुन तुम पूरी तरह से मेरी शरण में आ जाओ मैं तुम्हें मुक्ति प्रदान करूंगा। संसार में गुरु के बिना हमसे बहुत गलतियां होती है। गुरु के पास रहते शिष्य पाप कर्म से बचा रहता है। यदि संसार में रहते शिष्य के साथ कोई धन या पदवी के बल पर अन्याय होने लगे तो सद्गुरु शिष्य की रक्षा कर लेते हैं। इस के लिए हमें अपना मन तथा बुद्धि दोनों गुरु के चरणों में रखने होतेहैं। अगर हम अपना जीवन गुरु के चरणों की सेवा करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलते हुए व्यतीत करेंगे तो हमें मोक्ष मिलना मुश्किल नहीं होगा। हम सभी लोग सौभाग्यशाली हैं कि हमें भगवान के सत्संग में बैठने का मौका मिलता है। ऐसा सभी के साथ नहीं होता। जिन पर प्रभु की कृपा होती है वही आश्रम में सत्संग सुनने के लिए आते हैं।

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