Tuesday, October 13, 2026
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कैप्टन अमरिन्दर ने विरोधियों द्वारा टीकाकरण और फ़तेह किट संबंधी घोटाले के लगाए गए दोषों को राजनैतिक तौर पर प्रेरित बताते हुए किया ख़ारिज

चंडीगढ़(द स्टैलर न्यूज़)। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने विरोधी पार्टियों द्वारा कुछ निजी अस्पतालों को वैक्सीन सप्लाई करने और फ़तेह किटों की खरीद करने के सम्बन्ध में लगाए गए दोषों को राजनैतिक तौर पर प्रेरित बताते हुए रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महामारी से लाभ कमाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, जबकि सरकार तो लोगों की कीमती जि़दगियां बचाने के लिए सख़्त लड़ाई लड़ रही है। राजनैतिक हसरतों की पूर्ति करने और ग़ैर-मुद्दे उठाकर कोविड के विरुद्ध राज्य सरकार की जंग को कमज़ोर करने के लिए अकालियों और आम आदमी पार्टी पर बरसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनो पार्टियों की नजऱ साल 2022 की विधान सभा चुनावों पर है, जिस कारण इनके द्वारा अपने चुनावी एजंडे को आगे बढ़ाने के लिए बेवजह हो-हल्ला मचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गलत काम में राज्य सरकार शामिल नहीं है और जंग जैसी आपातकालीन स्थिति के मौके पर तत्काल और असाधारण फ़ैसले लेने होते हैं।

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उन्होंने कहा कि सभी प्रोटोकॉलों की सख़्ती से पालना की और आपातकालीन कदम भी संकट से निपटने के लिए उठाए गए। उन्होंने कहा कि कथित घोटालों संबंधी मीडिया रिपोर्टें सनसनीखेज़ से अधिक कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि सभी फ़ैसले लोगों के हित में लिए गए हैं और बाकायदा प्रक्रियाओं की पालना की गई। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इन मामलों पर वह अपने अधिकारियों के साथ शत-प्रतिशत खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सभी सही कदम उठाए गए और विरोधियों का कोलाहल उनकी सरकार के नेक इरादों को कमज़ोर नहीं कर सकता, क्योंकि राज्य सरकार का ध्यान लोगों की जि़दगियों की रक्षा करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि राज्य के डॉक्टर और अफसरशाह बहुत ही कठिन दौर में जंग लडऩे में शानदार कारगुज़ारी निभा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया कि पंजाब इस वायरस को हराएगा। मुख्यमंत्री ने शिरोमणि अकाली दल द्वारा कोविड के सुरक्षा उपायों और बन्दिशों का उल्लंघन करके राज्य सरकार के विरुद्ध बड़े स्तर पर किए जा रहे भीड़ को एकत्र करने का गंभीर नोटिस लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए बौखलाहट में आकर सुखबीर बादल और उसकी पार्टी के वर्कर अभी भीड़ एकत्र कर लोगों की जि़दगियां खतरे में डाल रहे हैं।

सभी दोषों को बेबुनियाद और निराधार बताते हुए ख़ारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने सुखबीर और उसकी जोड़ीदारों को हरेक जगह घोटाले दिखाई देते हैं, क्योंकि वह अपनी सरकार होते हुए हरेक तरह के घोटालों के साथ घिरी हुई थी और इन्होंने लोगों की सख़्त मेहनत से कमाए गए पैसों से जेबें भरीं। कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि कुछ निजी अस्पतालों को 40000 अतिरिक्त डोज़ मुहैया करवाना एक-समय का उपाय था, जिससे 18-45 उम्र-वर्ग में गैर-प्राथमिकता समूहों को भी टीकाकरण करवाने के कुछ विकल्प दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को उसी कीमत पर टीके दिए गए, जिस कीमत पर उन्होंने निर्माताओं से खऱीदने थे। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला लिया इस कारण लिया गया था, क्योंकि शुरू में पंजाब में सिफऱ् दो निजी अस्पताल ही थे, जो केंद्र सरकार द्वारा आरक्षित 25 प्रतिशत कोटे में से टीके खरीदने में कामयाब रहे थे। उन्होंने कहा कि विदेश जाने वाले विद्यार्थियों और अन्यों को तुरंत टीकाकरण की ज़रूरत थी और वह भुगतान करने के लिए तैयार थे, इसलिए राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय के तौर पर यह टीके निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराने का फ़ैसला किया था। हालाँकि सरकार के फ़ैसले को सही भावना से नहीं देखा जा रहा था, इसलिए इसको वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि परन्तु किसी भी अनियमितताओं का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि सारा पैसा स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण फंड में गया और सरकार द्वारा मुफ़्त में लगाए जाने वाले टीकों की खऱीद के लिए इस्तेमाल किया जाना था।

फ़तेह किटों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सराहना योग्य है कि स्वास्थ्य विभाग जो लोगों को मानक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए दिन-रात काम कर रहा है, ने लहर के शिखर के दौरान भी समय पर सप्लाई को यकीनी बनाया। उन्होंने कहा कि इन किटों में पल्स ऑक्सीमीटर भी उपलब्ध करवाए गए, हालाँकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से कोई सप्लाई न मिलने के कारण इसकी कमी थी। उन्होंने कहा कि वास्तव में पंजाब अन्य राज्यों की अपेक्षा कम मूल्य पर इसको खरीदने में कामयाब रहा। कैप्टन अमरिन्दर ने कहा ‘‘मेरी सरकार ने हमेशा लोगों की जि़दगी बचाने को प्राथमिकता दी है और महामारी के समय के दौरान राजनीति खेलना और गलत जानकारी फैलाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।’’ राज्य सरकार ने इस समय पर 7475 फ़तेह किटें बाँटी हैं, जिसमें मौजूदा समय में घरेलू एकांतवास के अधीन सक्रिय मामलों में 80.92 प्रतिशत को कवर किया गया है। स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने कहा कि निजी अस्पतालों को दिए गए 42,000 टीकों में से सिफऱ् 1300 का प्रयोग किया गया था और बाकी पहले ही राज्य सरकार को वापस कर दिए गए थे। राज्य सरकार संशोधित टीकाकरण नीति की पालना करते हुए केंद्र को निजी अस्पतालों का ग़ैर-निर्धारित कोटा राज्य को देने के लिए कह रही थी, जिसके अनुसार भारत सरकार तैयार की गई वैक्सीन में से 75 प्रतिशत की खरीद करेगी। संशोधित नीति के अंतर्गत भारत सरकार 21 जून से 18 साल से अधिक उम्र वर्ग के टीकाकरण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीके मुहैया करवाएगी और यह लोगों को मुफ़्त दिए जाएंगे। निर्माताओं को 21 जून से पहले राज्य द्वारा खऱीदे गए टीकों की सप्लाई करने की अपील की गई है।

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