
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। बड़े आश्चर्य से यह सुनने को मिला कि हरियाणा कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि जितने भी विधायक साठ वर्ष के हो गए हैं उनको दस हजार रुपये प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता दिया जाएगा। जहां तक मैं जानती हूं विधायकों को पेंशन अवश्य मिलती होगी और सरकारी अस्पतालों में दवाई आदि भी विधायकों को निशुल्क मिलती है। इसके साथ ही जब कोई अस्पताल में दाखिल होकर उपचार करवाता है तो वह खर्च भी सरकार से मिल जाता है। क्या कभी सरकारों ने यह सोचा कि जो सेवानिवृत्त कर्मचारी साठ साल से उुपर हो चुके हैं, सत्तर और अस्सी के बीच चल रहे हैं उनका गुजारा कैसे होता होगा। आगे से तो कर्मचारियों की पेंशन भी बंद हो गई है।

अगर कुछ करना था तो जो सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं उनहें सासठ साल की आयु पार करते पेंंशन नहीं तो चिकित्सा भत्ता को दिया जाता। यह ऐसा प्रस्ताव है जिसका विधानसभा में किसी पार्टी का नेता और विधायक विरोध नहीं करेगा, क्योंकि सबकी ऐसी स्थिति आनी है जब वे पूर्व विधायक हो जाएंगे। हरियाणा सरकार को अपने कर्मचारियों के विषय में भी सोचना चाहिए। केवल हरियाणा नहीं अपितु पंजाब समेत सारे देश की सरकारों को विधायकों, सांसदों को लाभ देने से पहले अपने कर्मचारियों का हित सोचना चाहिए। क्या सरकारें जानती हैं कि बहुत से राज्यों में जो कर्मचारी वर्षों से ठेके पर काम कर रहे हैं उनको तो हर महीने वेतन ही दस हजार रुपयेे नहीं मिलता। यह लोकतंत्र नहीं है, सरकार कर्मचारियों की चिंता करे, विधायकों को तो पेंशन ही काफी मिल जाती है।












