
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़), संदीप डोगरा। एक समय था जब भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ को ढाहकर कमल का फूल खिलाया था तथा काफी लंबे समय तक भाजपा का किला मजबूत रहा। लेकिन 2012 में कांग्रेस ने एक बार फिर से अपनी बढ़त बनाते हुए 10 साल तक अपना वर्चस्व कायम रखा। हाल ही में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सत्ता संभाली और होशियारपुर की सीट कांग्रेस से छूटकर आप के खाते में चली गई। काफी लंबा समां राज करने के बावजूद आज भाजपा की स्थिति किसी उजड़े व विरान खेत की तरह प्रतीत हो रही है, जिसका कारण आपसी फूट एवं गुटबाजी कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। कारण कुछ भी हो, लेकिन इन दिनों होशियारपुर से जुड़े भाजपा नेताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। क्योंकि पिछले कई सालों से पार्टी द्वारा होशियारपुर से संबंधित किसी भी बड़े नेता को कोई बड़ी जिम्मेदारी न दिए जाने से यहां का भाजपा कार्यकर्ता कहीं न कहीं मायूस हो रहा था। लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है उससे जहां कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा वहीं किसी एक नेता को मिलने जा रही किसी बड़ी जिम्मेदारी से 2027 की राह भी आसान होती दिखने लगी है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि क्या किसी नेता को केन्द्र द्वारा जिम्मेदारी दी जाती है या नहीं। फिलहाल इस खबर को लेकर जहां अंदरखाते नेतागण उत्साहित प्रतीत हो रहे हैं वहीं उनके समर्थकों में भी खुशी की लहर है।

आपको बता दें कि कांग्रेस का किला धवस्त करने वाले तीक्ष्ण सूद तीन बार विधायक रहे, मंत्री रहे और पार्टी में बड़े ओहदों पर कार्य किया। इसके साथ ही वर्तमान समय में भी पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी दे रखी है तथा उनके नाम की भी चर्चा है कि पार्टी उन्हें किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाज सकती है।
पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना की बात करें तो वह राज्यसभी सांसद, विधायक, लोकसभा सांसद, प्रदेश अध्यक्ष व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर पार्टी की सेवा कर चुके हैं और उनके नाम को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला जोकि 2014 में होशियारपुर से लोकसभा सांसद बने, प्रदेश अध्यक्ष रहे, एससी कमिशन के चेयरमैन रहे और कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं तथा उनके नाम को लेकर भी विचार विमर्श किया जा रहा है कि 2027 के मद्देनजर दलित वोट को लुभाने के लिए पार्टी कोई नया कार्ड खेल सकती है। इतना ही नहीं भले ही राजनीति में श्री सांपला को दलित वोट बैंक के रुप में देखा जाता हो, लेकिन श्री सांपला ने हर वर्ग में अपनी जगह बनाने में काफी हद तक कामयाबी हासिल की है। इसलिए उनके नाम की भी चर्चा सामने आ रही है।
सूत्रों की माने तो पूर्व सांसद व मंत्री सोम प्रकाश के नाम की भी चर्चा है, लेकिन उनका अधिक मोह फगवाड़ा से होने के चलते उनके नाम को लेकर असमंजस कायम है कि उन्हें अगर कोई जिम्मेदारी दी जाती है तो क्या होशियारपुर निवासी उसे स्वीकार करते हैं या नहीं। लेकिन, यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उनके लोकसभा सांसद के कार्यकाल में होशियारपुर के हाथ किसी बड़े प्रोजैक्ट से खाली ही रहे तथा उनका जनता के साथ संपर्क अभियान भी काफी हद तक फेल ही रहा। सूत्रों की माने तो, उनके नाम की चर्चा तो है, मगर स्थित साफ नहीं हो रही।
अब यह तो वक्त ही बताएगा कि आखिर राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है, लेकिन पार्टी सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार अगर होशियारपुर से संबंधित किसी बड़े नेता को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है तो इससे यकीनन तौर पर आने वाले चुनाव में पार्टी कैडर पूरे मनोबल एवं उत्साह से बढ़त की ओर बढ़ सकता है और पार्टी अपने गढ़ यानि किले की खोई हुई चाबियां प्राप्त करने में कामयाब हो सकती है। फिलहाल सभी नेता आशावान प्रतीत हो रहे हैं।











