
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। मजीठा निवासी जोबनप्रीत सिंह की कथित अवैध गिरफ्तारी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उनकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने माना कि जोबनप्रीत सिंह को पंजाब पुलिस द्वारा हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार, 31 मई की सुबह जोबनप्रीत सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने गिरफ्तारी के लिखित आधार प्रस्तुत नहीं किए, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन माना गया। याचिका में दावा किया गया कि हाल ही में हुए नगर पालिका चुनावों के दौरान जोबनप्रीत सिंह शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के चुनाव एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे। उनके पिता मुखवंत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना के तहत उनके बेटे को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया।

उन्होंने अदालत से जोबनप्रीत सिंह को असंवैधानिक और अवैध हिरासत से मुक्त कराने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार, डीजीपी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक सुरक्षा उपायों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। अब हाईकोर्ट द्वारा जोबनप्रीत सिंह की रिहाई के आदेश जारी किए जाने के बाद मामले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अदालत के इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर उसे तुरंत रिहा करने का आदेश देने के बाद, शिरोमणि अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के समर्थकों ने मजीठा में लगे ‘गुमशुदगी और भगोड़ा’ वाले होर्डिंग्स को फाड़ दिया।












