Saturday, October 17, 2026
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पंजाब कैबिनेट द्वारा एक हेक्टेयर तक के वन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले प्रोजेक्टों में कम्पनसेटरी अफोरेस्टेशन के लिए व्यापक नीति को मंजूरी

चंडीगढ़(द स्टैलर न्यूज़)। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने आज राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एक हेक्टेयर तक के वन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले प्रोजेक्टों में कम्पनसेटरी अफोरेस्टेशन (क्षतिपूर्ति के तौर पर और पौधे लगाना) संबंधी एक व्यापक नीति को मंजूरी दी है।यह नीति, जिसमें आर्थिकता और वातावरण के संतुलन के ज़रूरी तत्वों को शामिल किया गया है, भारत सरकार द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत वन एवं वन्य जीव सुरक्षा विभाग को जारी की गई आम मंज़ूरी के अनुसार है। मंत्रीमंडल द्वारा मुख्यमंत्री को उक्त नीति में भविष्य में किसी भी संशोधन को मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया।मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि नीति के अनुसार, उपभोक्ता एजेंसियों द्वारा कुलेक्टर रेट जमा 30 प्रतिशत के अनुसार समान ग़ैर-वन भूमि या उसकी कीमत मुहैया करवाने के लिए अंडरटेकिंग दी जाएंगी। पेशकश की गई ग़ैर-वन भूमि हर पक्ष से मुक्त होनी चाहिए और किसी सरकारी नियम या कानून के अंतर्गत वर्जित न हो।यदि उपभोक्ता एजेंसी ज़मीन की कीमत मुहैया करवाना चाहती है तो यह इकट्ठी की गई रकम इस उदेश्य के लिए खोले गए बैंक खातों में पंजाब राज वन विकास निगम (पीएसएफडीसी) के पास जमा कर दी जायेगी और इस रकम का प्रयोग गैर-वन भूमि की खरीद के मकसद के साथ किया जायेगा। पीएसएफडीसी यह यकीनी बनाएगी कि किसी वित्त वर्ष के दौरान, वह 80 प्रतिशत फंड के प्रयोग के साथ कम्पनसेटरी अफोरेस्टेशन के लिए ज़मीन ख़रीदेगी जो उस वित्त वर्ष 1 अप्रैल को शुरुआती बकाए के तौर पर उपलब्ध हैं।

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इसके अलावा, पीएसएफडीसी 30 प्रतिशत से अधिक कुलैक्टर रेट के आधार पर उपलब्ध पंचायती ज़मीनों को पहल के आधार पर भी ख़रीदेगी। इसकी समीक्षा त्रिपक्षीय समिति करेगी।प्रवक्ता ने नीति के फायदों के बारे बताते हुये कहा कि यह नीति अतिरिक्त लैंड बैंक के महत्वपूर्ण समूह को बनाने की सहूलतें देती है जिनको उपभोक्ता एजेंसी इस्तेमाल कर सकती है। इसलिए राज्य के महत्वपूर्ण विकास प्रोजेक्टों के लिए वन विभाग की मंजूरी में देरी नहीं की जाऐगी क्योंकि पी.एस.एफ.डी.सी. की तरफ से कंपनसेंटरी अफारेस्टेशन (क्षति के तौर पर और पौधे लगाने) के लिए स्पांसर विभाग को जमीन मुहैया करवाई जाऐगी। इसके इलावा नीति उपभोक्ता एजेंसियों को (अपनी सुविधा अनुसार) गैर -वन्य जमीनों के समान या मौजूदा कुलैकटर रेट प्लस 30 फीसदी के हिसाब से प्रभावित वन्य जमीन की कीमत चुकानी होगी। कंपनसेंटरी अफारस्टेशन के अंतर्गत योग्य पंचायती जमीन में वृक्ष लगाए जाएंगे जिससे क्षेत्र में हरियाली को बढ़ाया जा सके। विशेष स्थानों पर लगाए जाने वाले प्रोजेक्टों के मद्देनजर वन (संरक्षण) एक्ट, 1980 के अंतर्गत जंगली क्षेत्रों को दूसरी तरफ तबदील किया जा रहा है जिससे जंगलों के अधीन क्षेत्रफल का नुकसान न हो और वातावरण में संतुलन कायम रखा जा सके। गैर -वन जमीन पर कंपनसेंटरी अफारस्टेशन के द्वारा काटे गए वृक्षों की भरपायी की जा सकेगी और वातावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को घटाया जा सकेगा।अब तक वन(संरक्षण) एक्ट, 1980 के अधीन गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए भारत सरकार /राज्य सरकार की मंजूरी से लगभग 28,000 एकड़ से अधिक वन क्षेत्रफल को कई निजी और सार्वजनिक प्रोजेक्टों के लिए तबदील कर दिया गया है। इसके इलावा भारत सरकार की मंजूरी के बाद राज्य ने पंजाब लैंड प्रोटेक्शन एक्ट (पी. ऐल. पी. ए.), 1900 के अंतर्गत राज्य की लगभग 1,34,500 एकड़ जमीन को जंगलों की सूची से हटा दिया है।‘पंजाब निर्माण प्रोग्राम’ के अंतर्गत फंडों के इस्तेमाल के लिए दिशा-निर्देशों में संशोधनएक अन्य फैसले में मंत्रीमंडल ने ‘पी.एम.-10 -राज्य स्तरीय पहलकदमियां -पंजाब निर्माण प्रोग्राम’ के अंतर्गत फंडों के उचित इस्तेमाल के लिए दिशा -निर्देशों में संशोधन करने को मंजूरी दे दी।

इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के इलावा उनकी विकास सम्बन्धी जरूरतों पूरी करने में मदद मिलेगी जिससे यह यकीनी बनाया जायेगा कि यह प्रोग्राम लागू करने में कोई रुकावट न आए।संशोधित दिशा -निर्देशों के अनुसार पंजाब निर्माण प्रोग्राम, जिसकी शुरुआत साल 2006 में की गई थी, के अंतर्गत सभी कामों के प्रस्ताव अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (विकास)/अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (शहरी विकास) द्वारा डिप्टी कमिशनर की अध्यक्षता वाली एक जिला स्तरीय कमेटी के सामने रखे जायेगे। इस कमेटी में बतौर मैंबर जिले की म्यूंसपल निगम के सभी कमिशनर, अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (विकास), अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (शहरी विकास), जिला विकास और पंचायत अफसर शामिल होंगे। उप आर्थिक और सांख्यिकीय सलाहकार इसके मैंबर सचिव होंगे।इसके इलावा इस प्रोग्राम के अंतर्गत किये जाने वाले काम सरकारी संस्थाओं/पंचायती राज्य संस्थाओं और शहरी स्थानीय संस्थाओं के द्वारा संपूर्ण किये जाएंगे या डिप्टी कमिशनर की इच्छा अनुसार और सम्बन्धित विभागों के दिशा -निर्देशों के मुताबिक पूरे किये जाएंगे। जिलों को फंडों की अलाटमैंट ‘पंजाब निर्माण प्रोग्राम’ के अंतर्गत की जायेगी।

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