
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। 29 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में मंगलवार को इस्कान कपूरथला की ओर से 18वी संध्या फ़ेरी महोब्बत नगर में बड़े हर्षो उल्लास के साथ निकाली गई। जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। सभी शहर निवासी बड़ी ही उत्सुक्ता के साथ रथ यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैँ। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। कालोनी वालो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये हरिनाम संध्या फेरी श्री अतुल गर्ग जी के निवास स्थान से शुरु हो कर श्री इंदरजीत गुप्ता, रोहित गुप्ता, सिल्की गुप्ता जी के निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुई। भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) जी ने बताया की रथ यात्रा के दौरान हमने केवल खाते पीते हि नहीं रहना, अपना पुरा ध्यान हमने भगवान् के रथ मे रस्से को खींचने में लगाना है। जिस प्रकार रथ यात्रा के दौरान हमारे रास्ते में बहुत से प्रलोभन आएंगे उसी प्रकार हमारी भक्ति के रास्ते में भी बहुत से प्रलोभन आते हैँ। हमे करना क्या है अपनी भक्ति को उन प्रलोभनों के कारण रोकना नहीं है। बल्कि जो भी हमारे जीवन में हमे मिलता है उसे केवल भगवान् की सेवा में लगाना है। यही असली कृष्णभावनामृत है। वैसे भी इस संसार में जो कुछ है वो भगवान् का ही तो है, और हम सब उनके दास हैँ, तो मालिक की चीज मालिक को वापिस करने में केसा संकोच। यादी हम कोई वस्तु उसके मालिक के बिना पूछे इस्तेमाल करते हैँ तो हम चोर कहलाते हैँ। इसी प्रकार यादी भगवान् का दिया हुआ हम भगवान को अर्पण किये बिना इस्तमाल करते हैँ तो हम सब भी चोर ही कहलाएंगे।

एक भक्त के जीवन में यदी कुछ प्रलोभन आतें भी हैँ तो वह केवल उसकी परीक्षा लेने के लिए आते हैँ और हमने उस परीक्षा में फैल नहीं होना। हमने किसी भी हालात में भक्ति के पथ को नहीं छोड़ना क्योंकि केवल भक्ति के द्वारा हि हम भगवान् को जान सकते हैँ, भगवान को पा सकते हैँ। परन्तु हमे भक्ति है क्या यह कैसे पता चलेगा? भक्ति के बारे में हमे केवल भगवदगीता से पता चल सकता है। कहने का तात्पर्य है की अगर हम भगवान कृष्ण के किसी भक्त से उनकी लीलाओ ओर उनके गुणों के बारे मे श्रवण करेगे तभी हमारे हृदय में भगवान् के प्रति प्रेम उत्पन्न हो सकता है ओर कीर्तन के द्वारा हम भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर सकते हैं। हमें भगवान् श्री कृष्ण से यही प्रार्थना करनी चाहिए की भगवान् आपने तो पतीतों का उधार करने के लिए अवतार लिया है और इस संसार में मुझ से अधिक पतीत कोई नहीं है। आप कब मेरा उधार करोगे। भगवान् तो भाव ग्रही हैँ जब हम भी पूरे शुद्ध भाव से भगवान् को हरिनाम के द्वारा पहकारें गे तो भगवान् आवश्य हमारे हृदय में भी प्रवेश करे गे। उनके लिए हमे मन रूपी यन्त्र को अपने वश मे करना होगा। श्रीमद भगवद्गीता मे भगवान कृष्ण यही तो अर्जुन को समझा रहे हैं की कैसे इस चंचल मन को वश मे करना है ओर ये इतना सरल भी नही है उसे वश मे करने का केवल एक मात्र उपाय है भगवान कृष्ण के विषय मे श्रवण करना। जितना हो सके उतना हमे भगवान के बारे मे जानने की उत्सुकता होनी चाहिए। अगर मन भगवान कृष्ण के प्रति अग्रसर हो जाता है तो हम इस भोतिकता की समस्त प्रकार की चिन्ताओ से मुक्त हो सकते हैँ।
आगे बताते हुये प्रभुजी ने कहा की ऐसी कोई भी वस्तु जिससे भगावान श्री कृष्ण का कोई सम्बन्ध न हो उससे विरक्ति कर लेना ही बेहतर है। आज् भोतिक संसार मे हमारी सांसारिक वस्तुओ के प्रति आसक्ति है। यही इस संसार में हमारे बन्धन का कारण है। भोतिक संसार तभी सुख्मयी हो सकता है जब हम इस जगत की सभी वस्तुओ को कृष्ण भगवान की सेवा में लगा दें। भगवान श्री कृष्ण पर ध्यान केन्द्रित करना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है। हम इस भोतिक संसार मे रहते हुये भी भगवान कृष्ण का नाम जप ओर उनकी सेवा कर सकते हैं। भगवान के नाम का जप करने से हम इस जड़ रुपी संसारिक जगल की आग से बच सकते हैँ। प्रभु जी ने कहा की लोग बहुत उत्साह के साथ हरिनाम मे आ रहे है। भगवान के नाम का कीर्तन किया जाता है ओर उनकी दिव्य लीलाओ का श्रवण किया जाता है। जो व्यक्ति भगवान के नाम का कीर्तन करता हुआ रथयात्रा में शामिल होता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। उलेखनीय है की 29 जून को शाम 5 बजे प्राचीन श्री रानी साहिबा मंदिर से, सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। सभी शहर निवासी रथ यात्रा में शामिल हो कर अपने जीवन को सफल बनाएं।











