
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब सरकार वैसे तो शिक्षा में बड़े सुधार की बात करती है और अपने अध्यापकों को देश के बाहर दूसरे देशों में भेजकर अच्छे टीचर बनाने का भी प्रयास कर रही है, पर यहां तो दीपक तले अंधेरा है। दुनिया के ऐसे और कितने देश है जहां अपने देश की राष्ट्रभाषा हिंदी माध्यम में पढ़ने की आज्ञा न हो, पर अंग्रेजी माध्यम की छूट हो। अमरिंदर सरकार के समय सरकारी स्कूलों से ऐछिक विषय के रूप में भी संस्कृत गायब कर दी गई थी। अब पंजाब की जनता और देश की जनता यह चाहती है कि हमारे बच्चे हिंदी भी पढ़ें और संस्कृत भी। क्या पंजाब सरकार जानती है कि जो दूसरे राज्यों के लोग पंजाब में आकर बसते हैं उन्हें प्राइवेट स्कूलों में केवल इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि सरकारी स्कूलों में दसवी श्रेणी तक हिंदी माध्यम की छूट नहीं और संस्कृत से तो पंजाब सरकार की पिछले बीस वर्षों से दुश्मनी सारे जमाने के सामने आ गई है।

क्या पंजाब सरकार जानती है कि हमारे सारे ग्रंथ हमारे इतिहास, संस्कृति सब संस्कृत से जुड़े हैं। आखिर क्या कारण है कि संस्कृत का सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों से पूरी तरह बहिष्कार है। सरकारें स्मार्ट स्कूल का अर्थ यही समझती है कि बच्चे कुछ अंग्रेजी बोलें, गले में नेकटाई लगाएं और नमस्ते जय हिंद के स्थान पर गुड मार्निंग गुड इवनिंग करें। अगर यही स्मार्टनेस है तो यह पंजाब के बच्चों के किसी काम की नहीं। सचमुच स्मार्ट बनाना है तो उन्हें अपने देश के रीति रिवाजों से अपनी भाषा से संस्कृति से अवगत करवाया जाए। आज की हालत तो यह है कि बच्चे देश और दुनिया की बात तो दूर पंजाब के शहीदों के विषय में भी नहीं जानते। उसकी शिक्षा देने के लिए विशेष प्रबंध किया जाए।











