
मुकेरियां (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब सरकार की ड्रग्स के खिलाफ मुहिम पर यहां के पास के गांव उमरपुर में ड्रग्स के ओवरडोज से एक नौजवान की मौत ने सवालिया निशान लगा दिया है। नौजवान की मौत ने जहां ड्रग तस्करों के खिलाफ पुलिस की सख्ती की असलियत सामने ला दी है, वहीं ड्रग तस्करों पर लगाम लगाने वाले सरकार के खुफिया नेटवर्क का भी पर्दाफाश कर दिया है और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवा दिया है, लेकिन जिन लोगों को पुलिस ने अब इस केस में नामजद किया है, उन्हें पहले नामजद क्यों नहीं किया गया, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। हाल ही में पुलिस द्वारा लगाए गए ड्रग अवेयरनेस कैंप की असलियत भी बताई है,

मृतक की मां बब्बू ने कहा कि वह लोगों के घरों में काम करके गुज़ारा करती है। उनका बेटा अजय कुमार गिल (करीब 22-23 साल) गांव में कुछ लोगों द्वारा बेचे जा रहे ड्रग्स की चपेट में आ गया था। कल रात वह करीब 2:30 बजे तक अपने बेटे को ढूंढती रहीं, लेकिन वह नहीं मिला। जब वह करीब 3 बजे उठीं, तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा दरवाज़े पर मरा हुआ पड़ा है, उसके हाथ में कथित ड्रग्स से भरी सिरिंज है और पास में ही ड्रग्स की अंगूठी बनाने वाला वैक्स पेपर भी पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में कथित ड्रग्स की बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है और उन्होंने इस बारे में पंचायत को भी बताया था, लेकिन पंचायत द्वारा ड्रग्स तस्करों के खिलाफ समय पर कार्रवाई न करने के कारण उनके बेटे की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग्स तस्करों की पुलिस से मिलीभगत है और पंचायत भी जानबूझकर ड्रग्स तस्करों के खिलाफ चुप है। मौके पर मौजूद गांव वालों ने कहा कि गांव में खुलेआम ड्रग्स बिक रहा है और तस्करों की पुलिस और खुफिया एजेंसियों से मिलीभगत है। ड्रग्स तस्करों से मिले नीले नोटों ने सरकार की ड्रग्स के खिलाफ मुहिम को कमजोर कर दिया है। यहां पुलिस और खुफिया एजेंसियों में लंबे समय से तैनात अधिकारी असलियत से आंखें मूंदकर हुक्मरानों की जी-हुजूरी में लगे हुए हैं। जिन खुफिया अधिकारियों पर नशे को जड़ से खत्म करने की जिम्मेदारी है, वे ही नशा तस्करों को बचा रहे हैं। गांव के कुछ लोगों ने पुलिस खुफिया विभाग को बताया था कि गांव की एक पंच के घर का नौकर नशा बेच रहा है। लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बॉक्स: डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने पुलिस पर लगे आरोपों को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। आज भी परिवार ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी है, उन्हें सिर्फ सोशल मीडिया पर मिली एक पोस्ट से जानकारी मिली है। 9 जनवरी को पुलिस और सिविल प्रशासन की ओर से लगाए गए जागरूकता कैंप के दौरान अधिकारियों और वॉलंटियर्स ने घर-घर जाकर नशा तस्करों के बारे में जानकारी मांगी थी, लेकिन किसी ने भी गांव में नशा बिकने की बात नहीं बताई। उन्होंने साफ किया कि पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ पूरी तरह से सख्त है और पुलिस पर तस्करों की मदद करने के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों के बयान पर मृतक अजय गिल को अपने साथ ले जाने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। वहीं, खुफिया विभाग के DSP संजीव कुमार ने ड्रग्स को लेकर खुफिया तंत्र की नाकामी के बारे में बार बार फोन किया तो व्यस्त आता रहा।












