
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज), नीरज धीमान: देश के बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने और उनके खान-पान में सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने एक बड़ा कदम उठाया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत में बच्चों के बीच बढ़ते मधुमेह (डायबिटीज) के मामलों पर चिंता जताए जाने के बाद, आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक सख्त एडवाइजरी जारी की है ।

NCPCR के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं । आयोग ने स्पष्ट किया है कि वसा (Fat), चीनी और नमक (HFSS) से भरपूर खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन बच्चों में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है ।
स्कूलों और आंगनबाड़ियों के लिए अहम निर्देश
इस एडवाइजरी के तहत बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाने को कहा गया है:
· स्कूलों में लगेंगे ‘शुगर बोर्ड’: सभी स्कूलों में जागरूकता फैलाने के लिए ‘शुगर बोर्ड’ लगाना अनिवार्य करने की सलाह दी गई है, ताकि छात्र चीनी के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक हो सकें 。
· कैंटीन में जंक फूड पर रोक: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के तहत स्कूल परिसरों, कैंटीन और हॉस्टल के साथ-साथ स्कूल के 50 मीटर के दायरे में HFSS (जंक फूड) की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं ।
· आंगनबाड़ियों में संतुलित आहार: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी और नमक के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने को कहा गया है ।
इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल के तहत सरकारी कार्यालयों में भी ‘ऑयल और शुगर बोर्ड’ लगाने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने की बात कही गई है । सभी राज्य बाल अधिकार निकायों (SCPCRs) को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने और अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द साझा करने का निर्देश दिया गया है ।












