
राजस्थान (द स्टैलर न्यूज़)। मानव सेवा के क्षेत्र में भरतपुर ने नया इतिहास रच दिया। अपना घर आश्रम को दुनिया के सबसे बड़े महिला निराश्रित आश्रय गृह के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया। यह उपलब्धि 3295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं को सम्मानपूर्वक आश्रय, उपचार और देखभाल उपलब्ध कराने के आधार पर मिली है। आश्रम संस्थापक डा. बीएम भारद्वाज ने बताया कि रिकॉर्ड प्रयास के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा नियुक्त निर्णायक अधिकारी ऋषि नाथ की मौजूदगी में संपूर्ण प्रक्रिया का सत्यापन किया गया। पूरे आयोजन की आधिकारिक वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन किया गया। साथ ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्धारित दिशा-निर्देशों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सभी तथ्यों और व्यवस्थाओं की जांच की गई। डा. बीएम भारद्वाज ने कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि सेवा का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अमेरिका और जापान सहित कई देशों में इस तरह के होम हैं, लेकिन महिलाओं के लिए इससे बड़ा आश्रय गृह कहीं नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आश्रम की आवास व्यवस्था, मेडिकल सुविधाएं, हाइजीन, क्लीनिक, भोजन और केयर सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पाया गया। प्रति महिला 126 वर्ग फुट स्थान उपलब्ध कराने की जानकारी देते हुए डा. भारद्वाज ने बताया कि करीब छह महीने से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के साथ प्रक्रिया चल रही थी और इस दौरान लगभग 200 ई-मेल के माध्यम से विभिन्न जानकारियां साझा की गईं। आश्रम का निर्माण लगभग 9 लाख वर्गफुट क्षेत्र में किया गया है तथा प्रत्येक महिला को अंतरराष्ट्रीय मानकों से अधिक करीब 126 वर्गफुट स्थान उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने बताया कि 25 वर्ष पहले इस संकल्प के साथ अपना घर की शुरुआत हुई थी कि कोई भी असहाय, निराश्रित और बीमार व्यक्ति संसाधनों के अभाव में दम न तोड़े। आज देशभर में अपना घर के 71 आश्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि एक आश्रम नेपाल के काठमांडू में भी चल रहा है। भरतपुर आश्रम में वर्तमान में 6875 प्रभुजन रह रहे हैं, जिनमें 3295 महिलाएं शामिल हैं डा. भारद्वाज ने कहा कि यह केवल भरतपुर या राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है, अब दुनिया में महिलाओं के सबसे बड़े सेवा एवं आश्रय केंद्र के रूप में अपना घर भरतपुर का नाम हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रभु कृपा, सेवा साथियों और वर्षों से संस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले सहयोगियों के समर्पण का परिणाम है। रिकॉर्ड घोषणा के बाद आश्रम परिसर में खुशी का माहौल रहा।











