
सुंदरनगरर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार द्वारा राज्य भाषा हिंदी को बड़े ही उत्साह से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने के लिए उस देश की भाषा का अहम रोल होता है। भारत में अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग भाषा होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा एक कोशिश की जा रही है कि हिंदी भाषा को प्रफुल्लित एवं उत्साहित किया जाए। बीबीएमबी के बीएसएल प्रोजेक्ट सुंदर नगर में हुए एक सादे समारोह में मुख्य अभियंता बीएसएल प्रोजेक्ट सुंदर नगर ने कहा कि उन्हें जानकर बहुत अच्छा लगा कि जहां 90% कार्य हिंदी में हो रहा है। उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न राज्यों में आई भाषा संबंधी कठिनाइयों का भी वर्णन किया। हिंदी अधिकारी अशोक शुक्ला ने बताया कि यह दुख की बात है कि आज तक भी वस्तुतः हिंदी को राजभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया है।

उन्होंने बताया कि 1949 में हिंदी भाषा को अपनाया गया और 1964 तक केवल मात्र हिंदी को राजभाषा बनाने का संकल्प लिया गया। तब तक अंग्रेजी भी साथ-साथ चलनी थी। उसके बाद पूर्ण रूप से कार्य हिंदी में करने थे। परंतु तब तक यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका था। अंततः 1963 में सरकार को राजभाषा अधिनियम लेकर आना पड़ा। जिस के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही राजभाषा के रूप में स्थापित हो गई। यही स्थिति आज तक चल रही है। जो कि दुख का विषय है। 8 सितंबर से 10 सितंबर तक बीएसएल प्रोजेक्ट पर करवाई गई प्रतियोगिताओं में उत्तीर्ण रहे प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी वितरित किए गए। इस मौके अन्य के अलावा उप मुख्य अभियंता विमल कुमार मीणा, कार्यकारी अभियंता राजेश गुप्ता, चंद्रमणि शर्मा, प्रधानाचार्य एमआर गौतम, अधीक्षक ग्रेड वन राकेश भार्गव, निजी सचिव रमेश शर्मा एवं अन्य भी उपस्थित थे।











