
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। हिंदुस्तान के करोड़ों लोग तो ऐसे हैं जो सरकारी अस्पताल तक भी इलाज के लिए नहीं पहुंच सकते और मध्यवर्गीय लोग सरकारी अस्पतालों में जाते नहीं। वे किसी भी तरह प्रबंध करके प्राइवेट नर्सिंग होम्स में जाते हैं। यह प्राइवेट अस्पताल भी जो अपने लिए सुपरस्पेशलिटी या बड़े अस्पताल लिखते हें वहां भी खर्च की कोई सीमा नहीं और छोटे शहर में भी लाखों मरीज के इलाज पर खर्च हो जाता है। सरकार को याद होगा कि कोरोना के मरीजों से कितनी लूट हुई थी। मध्य वर्ग के अधिकतर लोग स्वास्थ्य बीमा करवाते हैं, पर स्वास्थ्य बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा देना सरकारी लूट है, जनता के साथ अन्याय है। क्या सरकार जानती है कि निम्न मध्य वर्ग कितनी कठिनाई से अपना गुजारा करता है।

बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज उठाते हैं और बीमारी में तो अनेक लोगों को घर बार तक गिरवी रखना पड़ता है या बेचना पड़ता है। ऐसे में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो स्वास्थ्य बीमा करवा सकते हैं। अगर करवाते भी हैं तो उनकी हिम्मत बड़ी रकम का बीमा करवाने की नहीं रहती, पर इलाज के लिए ज्यादा रुपये चाहिए। भारत सरकार से भारत की गरीब और मध्य वर्गीय जनता की तरफ से यह अपील है कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी बिल्कुल बंद की जाए। एक जानकारी के अनुसार सरकार संभवत, इसे कम करने का सोच रही है, पर सोचते सोचते ही सरकार को दस बीस वर्ष बीत गए। भारत सरकार स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी बिल्कुल बंद करे और जनता को राहत दे।












