Sunday, October 25, 2026
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चुटकीः सर जी तुहाडे हुंदे कम्म रुक गया, ओ भरावा अजे रुक जा, एत्थे सानूं आप नूं टैंशन होई पेई आ

इक कहावत है कि आटे विच लूण तां गुनिया जा सकदा पर सुदा लूण नी… पर मौजूदा सरकार दे समें विच कुछ नेता इस कहावत दे उलट पूरी तरां नाल लूण गुनण विच लगे होए हन। तुसी वी सोच रहे होणे आ कि अज्ज इन्नी शुद्ध पंजाबी ओ वी हिंदी विच तां दस देइए कि कुछ गल्लां दा स्वाद पंजाबी विच ही आंदा है पर साढे बहुते रीडरां दे मोबाइल फोनां ते पंजाबी भाषा न खुलण कारण सानूं हिंदी विच लिखणा पै रिहा है।

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सो बात ऐसी कि इन दिनों पंजाब में भ्रष्टाचार मामले में फंसे आप विधायक रमन अरोड़ा को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और होशियारपुर शहर की बात करें तो पिछले कई दिनों से एक इमारत के चर्चे खूब हो रहे हैं और हों भी क्यों न, स्थानीय निकाय मंत्री के शहर में रिहायशी नक्शे पर नियमों को धत्ता बताकर कथित तौर पर बहुमंजिला कमर्शियल इमारत (जो देखने से किसी भी एंगल से रिहायशी नहीं लगती) जो खड़ी कर दी गई, और तो और इस मामले में अधिकारियों ने भी आनन फानन में शाकाज़ नोटिस दिए बिना ही इसकी सारी गाज़ एक इंस्पैक्टर पर गिराते हुए उसे सस्पैंड कर दिया व इस संबंधी उच्चाधिकारियों को लिखकर भेज दिया। मगर, अभी तक इमारत गिराने संबंधी या नक्शे के अनुसार बनवाने संबंधी कार्यवाही को अमल में लाए जाने के बारे में कोई भी औपचारिक जानकारी अधिकारी वर्ग द्वारा सांझा नहीं की गई है। इसके पीछे उनकी मजबूरी भी जायज सी प्रतीत हो रही है। आखिर डाक्टर के होते डाक्टर के विरुद्ध कैसे जाए कोई।

स्टैलर चुटकी

अब आते हैं चुटकी पर कि आखिर इस मामले में अंदर की क्या बात है। तो बात यूं है कि सूत्रों की माने तो एक अधिकारी जब इमारत की इंस्पैक्शन के लिए गया तो मालिक द्वारा उसे किसी डाक्टर से बात करने की बात कही गई तथा बात न करने की सूरत में…। आखिर उसे इस बात का घमंड हो भी क्यों न, क्योंकि मामला डाक्टर बिरादरी से जो जुड़ा है, जिसके चलते मामले में नोटिस देकर आए अधिकारी को सस्पैंशन का मुंह देखना पड़ा। हालांकि उससे पहले जो कर्मचारी थे सबकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए थी, मगर कहीं डाक्टर साहब को बुरा न लग जाए व लोक दिखावे के लिए विभागीय कार्यवाही के नाम पर एक कर्मचारी की बलि दे दी गई। सूत्रों की माने तो एक बड़े कद के नेता जी द्वारा खुद नियमों के विपरीत इमारत का निर्माण करके मिसाल पैदा की गई है तो वह दूसरों को कैसे रोकेंगे, यह बात मामला गोलमाल करने के लिए काफी है। जिसकी अगर जांच हो जाए तो सारा काला सच सबके सामने होगा और ईमानदारी की हेकड़ी भी निकलती हुई नज़र आएगी। जब मार्ग कमर्शियल हुआ नहीं और इलाका रिहायशी है तो वहां पर कमर्शियल नक्शा कैसे पास हो सकता है, समझ से परे है। और तो और सीएलयू का भी प्रोवीजन भी नहीं है। अब प्रोवीजन डाल दिया गया हो तो कह नहीं सकते, आखिर इमारत नेता जी की जो ठहरी।

पता चला है कि डाक्टर साहब डाक्टर साहब को मामला निपटाने का दवाब डालते हुए इमारत बनाने की अनुमति प्रदान करने हेतु कोई दूसरा द्वार खोजने का जोर डाल रहे हैं तथा दूसरी तरफ नेता जी डरे-डरे से प्रतीत हो रहे हैं। क्योंकि, रमन अरोड़ा का मामला प्रकाश में आने के बाद सभी अंदर ही अंदर डरे हुए हैं कि अगला नंबर किसका होगा…। इतना ही नहीं कई नेताओं ने तो बड़े नेताओं की जी-हजूरी भी बढ़ा दी है ताकि अगर कोई बात हो तो उसे होने से पहले ही रोका व दबाया जा सके। सूत्रों के अनुसार रही बात नेता जी की तो जिनका कभी कहना था कि करवाओ कम्म, देखदा केहड़ा रोकू, के स्वर भी बदले-बदले से लग रहे हैं व चर्चा है कि भरावा कुछ दिन रुक जा, एत्थे सानूं टैंशन होई पेई आ। अब यह टैंशन क्या है और क्यों है, यह तो आप सब भी समझते हैं तथा इस बारे में हम न ही चर्चा करें तो ठीक। क्योंकि, आप भी जानते हैं कि न तो अवैध माइनिंग रुकी और न ही अन्य प्रकार का भ्रष्टाचार, बदला तो बस इन सबका तरीका। एकाध बार कार्यवाही के नाम पर किसी को टांग देना भी भ्रष्टाचारियों को सबक के लिए काफी होता है। लेकिन यहां तो एक को उतारकर दूसरे को ताज पहनाने वालों की पहुंच काफी ऊंची होने के चलते लगता नहीं कि उन्हें अभी तक किसी से डरने की जरुरत है। आखिर गांधी जी की कृपा भी कोई चीज है या नहीं।

अब तो सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि आखिर इस मामले में क्या मोड़ आता है और स्थानीय निकाय मंत्री के शहर में नियमों को धत्ता बताकर बन रही इमारत पर रोक सिर्फ लोक दिखावे के लिए है या फिर इसे रेगुलाइज्ड़ करने के लिए कोई नया तरीका खोजकर दूसरों के लिए नियमों के विपरीत कार्य करने के द्वार खोले जाते हैं या फिर इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्यवाही की एक मिसाल कायम की जाती है। पता चला है कि मामला सीएम दरबार तक पहुंच चुका है और इसके चलते कईयों की धड़कने बढ़ी बढ़ी सी हैं।

क्या, कौन सा डाक्टर, किसकी बात और कहां की बात। आप सभी जानते सब हैं, बस सुनना मेरे से चाहते हैं। पर मैंने कभी बताया है जो आज बताऊंगा। मुझे पता है आप समझदार हैं और सारे गोलमाल को जानते हैं। आगे जो होगा सबके सामने आ ही जाएगा। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।

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