
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब सरकार पंजाब के स्कूलों में शिक्षा क्रांति का प्रयास कर रही है। पूरे पंजाब में सरकारी स्कूलों के बच्चों की संख्या बढ़ने और परिणाम अच्छे आने की बात भी सरकार कर रही है, पर मेरा पंजाब सरकार से यह निवेदन है कि सरकारी स्कूलों में यह सुनिश्चित करें कि कोई भी अध्यापक नशा नहीं करता और शराब नहीं पीता। जिस राज्य के अध्यापक शराब पिएंगे वहां बच्चों का चारित्रिक विकास हो ही नहीं सकता। जिस तरह कल पुलिस के कांस्टेबलों की भर्ती में डोप टेस्ट करवाए गए हैं अच्छा हो सभी विभागों के कर्मचारियों विशेषकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के डोप टेस्ट करवा दिए जाएं, पर शराब को भी नशा माना जाए, तभी इसका लाभ है।

इसके साथ ही जब तक पंजाब सरकार हिंदी और संस्कृत से दूरी रखेगी और संस्कृत को पूरी तरह सरकारी स्कूलों से बंद कर देगी तब तक बच्चों में न नई सोच आएगी, न कोई शिक्षा क्रांति हो सकेगी। संस्कृत पढ़े बिना विद्यार्थी अपने देश के प्राचीन साहित्य से जुड़ ही नहीं सकते। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री याद रखें कि संस्कृत के महत्व को देखते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कुछ संतों केा जो बाद में निर्मले बने, वाराणसी में संस्कृत पढ़ने भेजा था। आश्चर्य है कि दुनिया के बहुत से देश जर्मनी अमेरिका समेत संस्कृत पढ़ा रहे हैं, पर पंजाब की पिछली सरकारों को भी संस्कृत का पूरा विरोध रहा, जो नई पीढ़ी और नए भारत के अच्छा नहीं है।












