Saturday, October 24, 2026
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विधानसभाओं में सरकार और विरोधी दलों को यह बेअदबी याद क्यों नहीं आई: चावला

अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। कुछ दिन पहले मुक्तसर में दस वर्ष की बेटी का यौन शोषण हुआ। उस पर अत्याचार करके उसकी हत्या कर दी गई। किसी भी राजनीतिक दल से, सामाजिक कार्यकर्ताओं से मुक्तसर शहर को छोड़कर किसी ने इस बेटी के लिए आवाज नहीं उठी। अब तो विधानसभा का सत्र भी हो गया। इस बेटी जैसी न जाने कितनी बेटियां हैं जिनको पंजाब में और देश में जुल्म करके मार दिया गया।

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जहां पूरे देश का अपना धार्मिक समाज गाय हमारी माता कहता है, मानता भी है उसी पंजाब की विधानसभा में अमृतसर में पकड़ी गई गायों का बूचड़खाना किसी को याद नहीं। क्या यह बेअदबी नहीं? गाय तो हिंदू समाज को गौरव है, गोपाल की गाय है। हमारे धर्म का एक स्तंभ है। क्या यह बेअदबी नहीं। मुझे लगता है विधानसभा में बेअदबी की परिभाषा तय करनी चाहिए थी। श्री अश्विनी शर्मा ने ठीक कहा कि अगर वेद, पुराण, उपनिषद, रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण, महाभारत और देश भर में लगभग 100 रामायण अलग अलग ढंग से लिखी गई है तो क्या इन सबको शामिल करेंगे?

होना तो यह चाहिए कि हमारे देश के अध्यापक, धर्म गुरु, समाज शास्त्री ऐसा वातावरण बनाएं कि जो धर्म ग्रंथों में लिखा है उसका पालन सारा समाज करे। अगर राम जी के देश में दो भाई जमीन के टुकड़े के लिए पिता को मार देते हैं, भाई को मार देते हैं तो वह क्या बेअदबी नहीं। मेरे विचार में महापुरुषों के उपदेशों को ग्रंथों में दिए संदेश को न मानना, उसका अनादर करना सबसे बड़ा अपमान है। रामचरितमानस में तो यह भी लिखा है कि जो पराई स्त्री को बेटी के रूप में नहीं देखता उसे तो मार देना चाहिए, क्या हम कर पाएंगे? उसके अपमान को तो नहीं सह सकते। मेरा विधानसभा के सभी सदस्यों से विशेषकर सरकारी बेंचों से तथा शंकराचार्य जी समेत सभी धर्म गुरुओं से यह निवेदन है कि बेअदबी किसे कहा जाए वह तय करें। यह काम विधायक और सांसद नहीं कर सकते।

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