
जम्मू-कश्मीर (द स्टैलर न्यूज़)। जम्मू-कश्मीर के कटरा के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में इस साल शुरू हुए एमबीबीएस के पहले बैच के दाखिले को लेकर बड़ा हंगामा शुरू हो गया है। जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इंस्टीट्यूट के बाहर पहुंचकर प्रदर्शन किया। यह इंस्टीट्यूट श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटड़ा कैंपस में बना है। पहले बैच में एमबीबीएस की 50 सीटें रखी हैं। जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों की तरह इसकी दाखिला प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन कर रहा है। मौजूदा समय में 36 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है, जिसमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के बताए जा रहे हैं। खाली रहीं सीटों के लिए फिर से काउंसलिंग होने जा रही है। बोर्ड इस प्रक्रिया को मेरिट पर करता है। प्राप्त जानकारी के मुताबक प्रदर्शन कर रहे संगठनों की मांग है कि संस्थान के पहले बैच के स्टूडेंट्स की एडमिशन लिस्ट रद्द कर दी जाए। उनका दावा है कि इसमें 90 फीसदी मुस्लिम हैं।

संगठनों का कहना है कि संस्थान में हिंदूओं के लिए सीट आरक्षित होनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक उधमपुर के भाजपा विधायक आर एस पठानिया ने भी VHP और बजरंग दल की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वैष्णो देवी मंदिर को मिले दान से बने संस्थान में मुस्लिम समुदाय के लोगों का दबदबा नहीं होना चाहिए। उन्होंने भी संस्थान में हिंदू छात्रों के लिए सीट आरक्षित करने की मांग की। हालांकि रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमों के तहत किसी समुदाय को संस्थान में आरक्षण देना संभव नहीं है, क्योंकि वैष्णोदेवी मेडिकल इंस्टीट्यूट को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशंस ने वैष्णोदेवी मेडिकल इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए 50 उम्मीदवारों के लिस्ट को मंजूरी दी थी। इनमें से 42 छात्र कश्मीर के रहने वाले थे। वहीं आठ छात्र जम्मू के थे। इनमें से कश्मीर के 36 और जम्मू के तीन छात्रों ने एडमिशन भी ले लिया है।
विश्व हिंदू परिषद के जम्मू-कश्मीर ईकाई के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि संस्थान के 2025-26 सत्र के एडमिशन रोक देने चाहिए। उन्होंने मांग की कि मैनेजमेंट को अपनी गलती सुधारनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अगले सत्र में ऐसा न हो। उन्होंने जारी की गई 50 छात्रों की सूची को “मेडिकल कॉलेज का इस्लामीकरण करने की साज़िश” बताया। वहीं रिपोर्ट में संस्थान के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि एडमिशन सही तरीके से किए गए हैं और नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की गाइडलाइंस के अनुसार ही हैं। जिसके मुताबिक 85% सीटें जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए आरक्षित होनी चाहिए और 15% सीटें देश के बाकी हिस्सों के कैंडिडेट्स के लिए होनी चाहिए।












