
जम्मू-कश्मीर (द स्टैलर न्यूज़)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र शासित प्रदेश का बजट पेश किया। उन्होंने बजट 2026-27 में पर्यटन, कृषि, खेलों और सामाजिक कल्याण की योजनाओं के साथ सबको साथ लेकर चलने वाले विकास और पैसे की समझदारी पर जोर दिया। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल प्लान का मकसद केंद्र शासित प्रदेश में लगातार विकास, सामाजिक मेलजोल और आर्थिक खुशहाली के लिए एक मजबूत नींव रखना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार निवेश, इनोवेशन और भागीदारी वाले शासन को बढ़ावा देकर केंद्र शासित प्रदेश को एक आधुनिक, प्रगतिशील और आर्थिक रूप से जीवंत क्षेत्र में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “बहुत विनम्रता और पक्के इरादे के साथ, मैं आज वित्त मंत्री के तौर पर अपना दूसरा बजट पेश करने के लिए खड़ा हुआ हूं।

हमारे देश के वित्तीय भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” बजट को विकास का रोडमैप बताते हुए उन्होंने कहा, “यह बजट सिर्फ आंकड़ों का बहीखाता नहीं है, यह एक वित्तीय दिशा बताने वाला है जो हमें एक बेहतर भविष्य की ओर ले जाता है। यह लगातार आर्थिक विकास, सामाजिक मेलजोल और लगातार खुशहाली के लिए मजबूत नींव रखता है।” उन्होंने घोषणा की कि आगामी वित्तीय वर्ष में 2,300 से ज्यादा रिक्त पदों को फास्ट ट्रैक आधार पर भरा जाएगा। साथ हीविकास कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए 40,000 नए घर बनाए जाएंगे और 3 लाख बेघर परिवारों को घर दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि मजदूरों के लिए सराय और आदिवासियों के 10 हॉस्टल बनाए जाएंगे।
बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जबकि डेयरी सेक्टर में 7 नई मिल्क प्रोसेसिंग इकाई स्थापित की जाएंगी। सीएम उमर ने कहा कि बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक सर्विस और गवर्नेंस में रणनीतिक निवेश के जरिये समावेशी और टिकाऊ विकास पर फोकस करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं के लिए मौके बनाना है। वित्तीय दिक्कतों पर बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि खुद का टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू केंद्र शासित प्रदेश की बजटीय जरूरतों का सिर्फ 25 प्रतिशत ही पूरा करता है। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर, 2025 तक टैक्स से 10,265 करोड़ रुपये और नॉन-टैक्स सोर्स से 4,964 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हुआ। उन्होंने कहा कि कुल खर्च का लगभग 60 प्रतिशत सैलरी, पेंशन और डेट सर्विसिंग पर खर्च होता है।












