Thursday, October 8, 2026
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Oman से लौटी लड़की ने बताया कड़वा सच, गाए का मांस खिलाते थे, सरबत दा भला चैरीटेबल ट्रस्ट बना मसीहा

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। मेरे मामा की लड़की ओमान में रहती है तथा वह वहां पर किसी के घर में काम करती है। जब वह यहां आई हुई थी तो उसने कहा कि तूं मेरे साथ ओमान चल वहां पर कम से कम 25 हजार रुपये सैलरी पर तुझे काम पर रखवा दूंगी। यहां पर तुम्हारा 10-12 हजार में क्या बनता होगा। जब वह वहां पहुंची तो उसने उसे किसी और एजेंट के हवाले कर दिया। जिसने उसे एक कमरे में रखा और पासपोर्ट, फोन व जो भी उसके पास पैसे थे ले लिए। इसके बाद उसने उसे किसी के घर में काम करने के लिए भेजा।

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जब वहां पहुंची तो वह उससे सुबह 9 से रात के 11 बजे तक काम लेते थे तथा खाने में गाए का मांस व अन्य तरह का मांस देते थे, जबकि वह शाकाहारी है व उसे जबरदस्ती मांसाहार खाने को मजबूर किया जाता था। अगर सरबत दा भला चैरीटेबल ट्रस्ट उसकी मदद न करता तो वह शायद ही अपने घर कभी लौट पाती। वह ट्रस्ट का दिल से आभार व्यक्त करते हुए और लड़कियों से अपील करती है कि थोड़े से लालच में कोई भी ओमान या अन्य अरब देश में न जाए। यहां थोड़ा खाकर गुजारा करना वहां के पैसों से अच्छा है। यह कहना है कि सरबत दा भला चैरीटेबल ट्रस्ट के सहयोग से ओमान से लौटी होशियारपुर निवासी लड़की का।

जिया (काल्पनिक नाम) ने की लड़कियों से वहां न जाने की अपील

उसने भरे मन और आंखों से गिरते आंसूओं में बताया कि उसने जो नरक वहां देखा वह कोई और न देखे इसके लिए वह सभी अभिभावकों से अपील करती है कि वह किसी की बातों में न आएं और थोड़े से लालचवश अपनी बेटियों की जिंदगियां खराब न करें। अपना नाम जिया (काल्पनिक नाम) बताते हुए उसने बताया कि जब उसने इतनी देर काम करने से इंकार किया तो उसे मारा पीटा जाता तथा भूखा भी रखा जाता। उसने बताया कि एजेंट उन्हें 11 बजे सजधजकर तैयार होने को कहते थे तथा जो लड़की इंकार करती उसके साथ मारपीट की जाती। जब वह तैयार हो जाती थीं तो शेख वहां आते थे और अपने पसंद की लड़की को काम के लिए ले जाते।

जहां उनका हर प्रकार से शोषण किया जाता। उसने बताया कि एक लड़की की टांग टूट गई थी तथा उसमें रॉड़ पड़ी है उसे भी प्रताड़ित किया जाता और उससे भी बुरी तरह से तंग परेशान किया जाता। उसने बताया कि अभी भी पंजाब व अन्य स्थानों की कई लड़कियां एजेंटों के चंगुल में नरक भरी जिंदगी जीने को विवश हैं, जिन्हें बचाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।

जिया (काल्पनिक नाम) ने बताया कि इसके बाद जब उसने काम करने से इंकार कर दिया और किसी तरह से अपने घर बात की तो एजेंट ने वापिस भेजने के नाम पर 2 लाख की मांग रखी। जिसे उसके परिवार वाले घर बेचकर चुकाने के लिए मान गए। क्योंकि उसके पिता जी नहीं हैं और उनके पास ले दे कर एक छोटा सा घर ही है, जिसे भी उसकी मां को उसके लिए मजबूरन बेचना पड़ा। उन्हें डर था कि अगर वह रुपये दे भी दें तो क्या उसे वह वापिस भेज देंगे या नहीं। इसके चलते उसकी माता ने यहां पर सरबत दा भला चैरीटेबल ट्रस्ट के प्रधान आज्ञापाल सिंह साहनी से भेंट की और उन्हें सारी बात बताई। इस पर उन्होंने ओमान में स्थित ट्रस्ट की शाखा से संपर्क साधा और लड़की की मदद की बात कही। जिसके बाद एजेंटों को डर बैठ गया कि इसके पीछे कोई है, जो उनके लिए परेशानी बन सकता था। इसके बाद उन्होंने उसे वापिस भेजा। उसने अपील की कि कोई भी लड़की वहां न जाए तथा यहां पर कम पैसों में गुजारा करने में भी सबकी भलाई है।

ट्रस्ट के जिला अध्यक्ष आज्ञापाल सिंह साहनी ने अभिभावकों से अपील की कि वह अपने बच्चों को यहीं पर कोई न कोई टेक्निकल कोर्स करवाएं ताकि वह यहां पर रहते हुए ही अपनी जीविका चला सके। इस प्रकार अनाधिकृत एजेंटों के चंगुल में फंसकर अपनी जिंदगी खराब न करें। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसे जाने का इच्छुक है भी तो वह ट्रस्ट के कार्यालय से संपर्क करके वहां से भेजे कागजात एवं वहां पर कामकाज की स्थिति का पता कर सकता है। परन्तु छोड़े से लालच में आकर एजेंटों का शिकार न बनें।

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