Saturday, October 17, 2026
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एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में कौशल आधारित शिक्षा पर जोर

जालंधर (द स्टैलर न्यूज़)। एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर की प्रिंसिपल डॉ. नीरजा ढींगरा ने संस्थान की शैक्षणिक सोच, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों तथा विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं पत्रकार संजीव कुमार के साथ विशेष बातचीत के दौरान साझा की। डॉ. नीरजा ढींगरा ने कहा कि आज तेजी से बदलते पेशेवर वातावरण में केवल अकादमिक योग्यता पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, रचनात्मकता, औद्योगिक अनुभव और अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करना समय की आवश्यकता है।

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उन्होंने बताया कि कॉलेज में फिजियोथेरेपी, मल्टीमीडिया, परफॉर्मिंग आर्ट्स, एप्लाइड आर्ट, डिजाइन, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, ई-कॉमर्स सहित विभिन्न व्यावसायिक, पेशेवर और रचनात्मक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा डेटा साइंस, कॉस्मेटोलॉजी, थिएटर एंड स्टेज क्राफ्ट तथा ई-कॉमर्स में B.Voc. और M.Voc. कार्यक्रमों के साथ ग्राफिक डिजाइन, वेबसाइट डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग, ब्यूटी एवं वेलनेस जैसे शॉर्ट-टर्म कोर्स भी विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कॉलेज की विरासत का उल्लेख करते हुए डॉ. ढींगरा ने कहा कि संस्थान की स्थापना और इसकी शैक्षणिक सोच में दूरदर्शी शिक्षाविद् डॉ. सत्यापॉल जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कला एवं विशेष शिक्षा के क्षेत्र में उनकी प्रगतिशील सोच आज भी कॉलेज को दिशा प्रदान कर रही है। कॉलेज ने सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान बनाई है और लगातार 25 वर्षों तक यूथ फेस्टिवल चैंपियन रहने का गौरव हासिल किया है।

उन्होंने बताया कि कॉलेज विद्यार्थियों को अंतर-विषयक शिक्षा के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्टडी-एक्सचेंज कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित करता है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, स्टूडियो, ऑडिटोरियम, कार्यशालाओं, औद्योगिक भ्रमण तथा फ्लिप्ड क्लासरूम जैसी नवीन शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है।

डॉ. नीरजा ढींगरा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अनुकूलन क्षमता, नैतिकता, सहानुभूति, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा, “शिक्षा को व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी आकार देना चाहिए।”

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