
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन 251 पेज की विस्तृत एफआईआर सार्वजनिक होने के बाद सीबीआई के सामने पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। सीबीआई ने उन्हें चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में दोपहर 2:30 बजे बुलाया था। घुमन की ओर से दावा किया गया कि उन्हें विधिवत समन मिला ही नहीं। इसे लेकर उन्होंने सीबीआई अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की है। इसी बीच बुधवार देर शाम करीब आठ बजे सीबीआई की टीम भ्रष्टाचार मामले में कथित बिचौलिया नितिन गोहल के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर के फ्लैट में फिर पहुंची। देर रात तक चली तलाशी में कुछ दस्तावेज और डिजिटल डाटा कब्जे में लिए जाने की सूचना है। एफआईआर में ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, विभागीय नियमों में बदलाव, टेंडर, लाइसेंस, हथियार लाइसेंस, जमीन सौदों और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की मंजूरियों से जुड़े कथित प्रभाव का जिक्र है।

ईडी की सामग्री के हवाले से ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े मामलों और कई व्हाट्सएप चैट की जांच का भी उल्लेख है। कथित आर्थिक लेन-देन और नितिन गोहल से 20.98 लाख रुपये नकद बरामदगी का भी एफआईआर में जिक्र किया गया है। एफआईआर सार्वजनिक होने पर घुमन ने चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में अवमानना अर्जी दाखिल की है। उनके वकील ने कहा कि सीबीआई ने एफआईआर ऑनलाइन अपलोड करने से छूट मांगी थी जिसे अदालत ने मंजूर किया था। इसके बावजूद एफआईआर सार्वजनिक हो गई। अर्जी में एफआईआर सार्वजनिक होने की पूरी कड़ी का रिकॉर्ड तलब करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर 12 अक्तूबर तक जवाब मांगा है।
सीबीआई राजबीर सिंह घुमन समेत छह आरोपियों के मामले में डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। छह अक्तूबर को नौ ठिकानों पर दबिश के दौरान जब्त लैपटॉप, मोबाइल और दस्तावेजों से ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर, नीतिगत फैसलों और कथित लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ईडी के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और नितिन गोहल के बयानों को भी जांच का आधार बनाया गया है। सीबीआई डिजिटल डाटा के जरिए कथित संपर्कों और फैसलों के बीच कड़ी तलाश रही है। इस मामले में ईडी की ओर से की गई जांच और जुटाए गए साक्ष्य भी सीबीआई जांच को मजबूती देंगे। इसी के अंतर्गत करीब 60 कम्युनिकेशन डॉक्यूमेंट ऐसे हैं, जो कथित भ्रष्टाचार के राज खोल सकते हैं। इस दौरान कई अफसर भी ईडी व सीबीआई के रडार पर हैं। ईडी व सीबीआई दोनों जांच एजेंसियों का दावा है कि ये कम्युनिकेशन विभिन्न आरोपियों के बीच वर्ष 2023 से लेकर 2026 तक डिजिटल माध्यम से हुए। इनमें सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप से संबंधित सबूत मिले हैं।












