Thursday, October 29, 2026
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शहीदों का यह कैसा सम्मान, नहीं बन पाया शहीदी स्मारक

शहीदी स्मारक को बिना बनवाए ही 2013 में कर दिया था उद्घाटन 

हमीरपुर(द स्टैलर न्यूज़),रिपोर्ट: रजनीश शर्मा। शहीदों के लिए यह कैसा सम्मान! शहीद स्मारक का शिलान्यास 19 फरवरी, 2012 को तत्कालीन सी.एम. प्रेम कुमार धूमल ने किया था, जबकि बिना बने ही 9 अप्रैल 2013 को उस समय के नगर परिषद अध्यक्ष दीप कुमार ने इसका उद्घाटन भी कर दिया था। आज तक यहां शहीद स्मारक बना ही नहीं और 10 लाख से ज्यादा की राशि खर्च हो गई। शिलान्यास बाद अब इसकी भूमि को ही बदलने की योजना तैयार की गई। वजह यह भी बताई गई कि आनन-फ़ानन में शहीदी स्मारक का शिलान्यास किसी की मलकीयत भूमि पर ही कर दिया गया था।

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ज़मीन के मालिक ने अपनी जमीन को चारदीवारी से कवर कर वहाँ दुकानें बना ली हैं। जिला भर से संबंधित भारतीय सेना के अलग-अलग ऑपरेशनों में आतंकवादियों के सफाए के लिए चलाए अभियानों में डेढ़ हजार से ज्यादा सैनिक शहीद हो चुके हैं, लेकिन उनकी याद में बनाए जाने वाले शहीद स्मारक का कार्य ही शुरू नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इसका शिलान्यास जहां हुआ है, अब वहां उचित रास्ता और भूमि के न होने की बात को देखते हुए वहां से इसका स्थान ही दूसरी जगह पर चयनित की जा रही भूमि पर करने की योजना तैयार की गई है। बताया जा रहा है कि हमीरपुर शहीदी स्मारक को चिल्ड्रन पार्क हीरानगर में भी बनाने के प्रयास हुए लेकिन बात सिरे न चढ़ पाई।

– शहीदों के नाम पर हमेशा हमीरपुर में होती रही राजनीति

अब तक लाखों की राशि इसको लेकर खर्च की जा चुकी है, लेकिन मात्र सियासत के बात आगे नहीं बढ़ पा रही। जब भी जिला भर से कोई सैनिक शहीद होता है, तो बनने वाले शहीद स्मारक की बातें तो नेता करते रहे हैं, लेकिन इस कार्य को कौन और कब पूरा करवाएगा, किसी के पास जवाब ही नहीं है। बिना बने ही इसका शिलान्यास और उद्घाटन अब एक बार फिर चर्चा में है। पक्काभरो के पास करीब 12 लाख की राशि से तैयार होने वाले इस शहीद स्मारक का शिलान्यास तत्कालीन सीएम प्रेमकुमार धूमल ने सांसद और विधायक की उपस्थिति में फरवरी 2012 को किया गया था।

अप्रैल 2013 को तो तब नगर परिषद के अध्यक्ष से इसका उद्घाटन भी कर दिया है। लेकिन धरातल पर यह शहीद स्मारक बना ही नहीं है। इस पर करीब 13 लाख तक की राशि खर्च करने की भी बात सामने आई। अब इस शिलान्यास स्थल को बदल कर दडूही रोड़ के किनारे भूमि को प्रस्तावित किया गया है। जहां इस पर शहीद स्मारक बनाने की बात कही जा रही है। जब पहले भूमि का चयन हुआ और शिलान्यास तक करवा दिया गया, उस समय इन कमियों पर ध्यान किसी का क्यों नहीं गया यह बड़ा सवाल है।

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