Saturday, October 10, 2026
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कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वायरस के बदलते स्वरूप की जांच में विस्तार करने के दिए हुक्म

Chandigarh: Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh addresses a press conference in Chandigarh, on May 23, 2019. (Photo: IANS)

चंडीगढ़(द स्टैलर न्यूज़)। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शुक्रवार को सम्बन्धित विभागों को वायरस के बदलते स्वरूपों की जांच में विस्तार करने के हुक्म दिए जिससे कोविड के नये प्रकार के मामलों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मोहाली के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के लिए आई.सी.एम.आर. के साथ एम.ओ.यू. पूरा करने के प्रोजैक्ट में तेज़ी लाने के भी हुक्म दिए।हालाँकि डेल्टा प्लस रूप (मई महीने की सैंपलिंग के आधार पर पहले आए दो मामलों के अलावा) के कोई भी नये केस राज्य में नहीं आए हैं, परन्तु इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सरकारी मैडीकल कॉलेज और अस्पताल, पटियाला में वायरस के बदलते स्वरूपों की पहचान संबंधी लेबोरेटरी, जोकि पी.ए.टी.एच. की मदद से तैयार हो रही है, इसी महीने हर हाल में शुरू की जायेगी। पी.ए.टी.एच. द्वारा यह जानकारी दी गई कि मशीनें 25 जुलाई तक स्थापित कर दीं जाएंगी।

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सरकारी मैडीकल कॉलेज और अस्पताल, पटियाला की यौन रोगों की खोज संबंधी लेबोरेटरी द्वारा आई.एन.एस.ए.सी.ओ.जी. के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए अर्ज़ी भी दे दी गई है।कोविड स्थिति की वर्चुअल समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर संतोष प्रकट किया कि राज्य द्वारा अगले हफ्ते सरकारी मैडीकल कॉलेज और अस्पताल पटियाला में एक पायलट प्रोजैक्ट के द्वारा सूखी पट्टी के साथ जांच की शुरुआत की जा रही है। आर.टी.पी.सी.आर. जांच की तुलना में सूखी पट्टी के साथ जांच के ढंग की संवेदनशीलता 79 प्रतिशत जबकि सटीकता 99 प्रतिशत है। इसकी कम कीमत और तेज़ बारी को ध्यान में रखते हुए सूखी पट्टी वेरीएंट विधि को सिर्फ़ उन मौकों पर ही स्क्रीनिंग के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है जहाँ स्वचालित आर.एन.ए. एक्स्ट्रैक्शन उपलब्ध नहीं है।

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पंजाब ने 10 स्वस्थ्य संस्थानों की पहचान की है और प्रति स्थान कम-से-कम 15 सैंपल हर 15 दिनों बाद वायरस के बदलते स्वरूपों की पहचान के लिए भेजे जा रहे हैं। मीटिंग को यह भी जानकारी दी गई कि टीकाकरण के बाद आए पॉज़िटिव सैंपल, पुनः संक्रमण, मौत और गंभीर मामलों के अलावा कलस्टरिंग आदि के पॉज़िटिव सैंपलों को भी वायरस के बदलते स्वरूप की पहचान के लिए भेजा जा रहा है।

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