Saturday, October 24, 2026
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5 राज्य सभा सीटों का  चुनाव पुन: द्विवार्षिक करने हेतु राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को लिखा

चंडीगढ़(द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब की निर्वतमान  15 वीं विधानसभा, जिसका गठन   24  मार्च, 2017 को हुआ था एवं जिसका पांच वर्षो  का कार्यकाल आगामी 23 मार्च 2022  तक था, उसे 11 मार्च को  प्रदेश के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा मौजूदा  कार्यवाहक मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की सिफारिश पर   भंग कर दिया गया है। 11 मार्च को ही चुनाव आयोग द्वारा 16 वीं विधानसभा हेतु  नवनिर्वाचित सभी 117  सदस्यों (विधायकों ) के नामो की नोटिफिकेशन जारी कर दी गयी है जिससे नई विधानसभा का गठन हो गया है।  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने  बताया कि हालांकि 16 वीं विधानसभा के  गठन के बावजूद निवर्तमान  15 वीं  विधानसभा आगामी 23  मार्च तक कायम रह सकती थी परन्तु बीते कई दशकों से परंपरा  रही  है कि विधानसभा के आम चुनावों में पराजित होने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी या गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रदेश के  मतदाताओं के ताज़ा जनादेश का सम्मान करते हुए तुरंत पद से त्यागपत्र देकर कैबिनेट में पिछली विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल को कर देते हैं।

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 बहरहाल, अब भंग हो चुकी 15 वीं पंजाब विधानसभा का नाम  इतिहास में दर्ज हो जाएगा क्योंकि   उसके सदस्यों/विधायकों द्वारा उस सदन  के  पूरे कार्यकाल दौरान  एक भी राज्यसभा  सदस्य (सांसद) का निर्वाचन नहीं हो सका   जोकि  संभवतः देश में पहली बार हुआ है। आगामी  9 अप्रैल 2022  को पंजाब से  राज्य सभा हेतु मार्च, 2016 में  निर्वाचित सभी 5 सांसदों- सुखदेव सिंह ढींढसा, नरेश गुजराल, श्वेत मलिक, प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दुल्लो  का 6 वर्षों का कार्यकाल पूर्ण हो रहा है। हेमंत ने आधिकारिक रिकॉर्ड का अध्ययन कर बताया कि छः वर्ष पूर्व  चुनाव आयोग द्वारा  हालांकि 24 फरवरी 2016 को ही पंजाब की  उपरोक्त 5 सीटों का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया था एवं 23 मार्च 2016 तक समस्त चुनावी प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली गयी थी। उन्होंने  बताया कि लोक प्रतिनिधित्व कानून (आर.पी.) कानून, 1951 की धारा 12 के अनुसार हालांकि चुनाव आयोग राज्य सभा सीटें रिक्त होने की तिथि से तीन माह पहले तक उन सीटों का निर्वाचन करवाने  हेतु  निर्धारित नोटिफिकेशन जारी कर सकता है अर्थात इस वर्ष 10 जनवरी 2022 के बाद कभी भी  भारतीय चुनाव आयोग पंजाब से राज्य सभा  की 9 अप्रैल  2022 को रिक्त हो रही कुल 5 राज्य सभा सीटों के निर्वाचन हेतु चुनावी प्रक्रिया आरम्भ कर सकता था, परन्तु उसने ऐसा नहीं किया। 

इस बार  हालांकि आयोग द्वारा चुनावी कार्यक्रम इसी माह 7 मार्च को जारी किया गया. आगामी 14 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा नोटिफिकेशन जारी होगी, 21 मार्च तक नामांकन भरे जाएंगे, 22  मार्च को नामांकन की जांच होगी, 24   मार्च तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे, 31 मार्च को मतदान एवं  मतगणना होगी  एवं 2 अप्रैल तक ही निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हो पाएगी। हेमंत ने बताया कि 16 वी  पंजाब विधानसभा के   नतीजों में  आम आदमी पार्टी (आप ) ने प्रदेश की कुल 117 विधानसभा सीटों में से  92 अर्थात   तीन चौथाई से अधिक  सीटें जीती हैं.  आप पार्टी के पास सदन में इतना विशाल बहुमत होने के कारण पंजाब से आगामी 5 सीटों हेतु मतदान करवाने की नौबत ही नहीं आएगी एवं  उक्त सीटों के लिए आप के पांचों उम्मीदवार मतदान से पूर्व ही उम्मीदवारी का नामांकन  वापसी के अंतिम दिन ही रिटर्निंग अधिकारी द्वारा निर्वाचित घोषित कर दिए जाएंगे।  

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 5 सीटों के लिए एक साथ नहीं बल्कि 3 और 2 सीटों के लिए चुनाव आयोग द्वारा अलग -अलग चुनावी नोटिफिकेशन जारी कर राज्य सभा चुनाव करवाया जाएगा क्योंकि उक्त सीटों अलग अलग द्विवार्षिक चुनावी- चक्र की हैं.  जून, 1987 में पंजाब में  राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था जिस कारण अप्रैल, 1988 में  रिक्त हुई 3  और अप्रैल, 1990 में खाली हुई अन्य  2 राज्य सभा सीटों हेतु चुनाव नहीं करवाया जा सका था क्योंकि तब पंजाब में विधानसभा ही मौजूद नहीं थी। फरवरी, 1992 में जब 10 वीं  पंजाब विधानसभा का गठन हुआ तब उन  पिछले वर्षो ( 1988 और 1990 )  की कुल पांच राज्य सभा सीटों और वर्ष 1992 में उस वर्ष की रिक्त 2 अन्य सीटों का निर्वाचन करवाया गया जिस कारण 1992 में कुल 7 सीटों का निर्वाचन हुआ. उसके बाद हर छः वर्षो बाद अर्थात वर्ष  1998 , 2004 , 2010 , 2016 में और अब वर्ष  2022 में ऐसा होगा.  मार्च, 2022 में 5 और जून, 2022 को शेष 2 राज्य सभा सीटों के लिए निर्वाचन होगा.

इसी बीच हेमंत ने भारत के राष्ट्रपति, केंद्रीय  कानून मंत्रालय और भारतीय  चुनाव आयोग को लिख कर आह्वान किया है कि चूँकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 83  और लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 के अनुसार  देश के प्रत्येक  राज्य में हर दो वर्षो बाद राज्य सभा की निर्धारित  सीटों के हेतु  द्विवार्षिक चुनाव की व्यवस्था है  परन्तु  पंजाब में ऐसा चुनावी-चक्र बिगड़ गया है, इसलिए उसे पुन: सही किया जाना चाहिए। हेमंत का कानूनी मत  है कि लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की मौजूदा धारा 154, जो राज्य सभा सांसदों के कार्यकाल से सम्बंधित है,  का प्रयोग कर अथवा उसमें उपयुक्त  संशोधन कर ऐसा किया जा सकता हैं. इसके लिए यह व्यवस्था करनी होगी  कि पंजाब से  आगामी 3  राज्य सभा सीटो के  चुनाव  में निर्वाचित तीनो सांसदों का कार्यकाल अगली एक बार के लिए  6 वर्ष की  बजाये 2 वर्ष अर्थात अप्रैल, 2024 तक होगा. इसी प्रकार शेष 2 राज्य सभा सीटों के लिए  निर्वाचित दोनों सांसदों का कार्यकाल अगली एक  बार के लिए  6 वर्ष की  बजाये 4 वर्ष अर्थात अप्रैल, 2026 तक होगा. जहाँ तक जुलाई, 2022 में रिक्त होने वाली  2 सीटों का विषय है, उन पर  निर्वाचित सांसदो का  कार्यकाल जुलाई, 2028 तक अर्थात 6 वर्ष ही रहे।

अगर ऐसा किया जाता है तो  पंजाब में  अप्रैल, 2024 में राज्य सभा की  3 , अप्रैल, 2026 में 2 और जुलाई, 2028 में   2 सीटें रिक्त होंगी एवं उनके लिए उसी वर्ष  चुनाव करवाना होगा जिससे प्रदेश में द्विवार्षिक चुनावो की व्यवस्था फिर से लागू हो जायेगी. हेमंत का मानना है कि आप पार्टी को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि सदन  में 92 विधानसभा सीटों के कारण वह अप्रैल, 2024 और अप्रैल, 2026 में भी  अपने पांचो राज्य सभा सासंद निर्वाचित करवा सकती है।   

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