
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब के एक लाख से ज्यादा युवक युवतियां ठेके की नौकरी का शोषण की चक्की में पिसते रहे, पिस रहे हैं। पूरा काम करने के बाद भी थोड़ा वेतन कोई छुट्टी नहीं, कच्ची नौकरी की तलवार हर समय सिर पर लटकती और बीमारी में भी न सरकारी मेडिकल सहायता न छुट्टी। यह पंजाब की जवानी की किस्मत बन चुकी है। यह ठीक है कि वर्तमान सरकार ने लगभग तीस हजार ठेके की नौकरी कर रहे कर्मचारियों को रेगुलर किया है। अभी भी बहुत ज्यादा ऐसे हैं जो कच्ची नौकरी की पीड़ा सह रहे हैं, पर किसी को भी शायद यह याद नहीं होगा कि सन 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अमरिंदर सिंह जी ने ही पंजाब में ठेके पर भर्ती करने का बुरा रिवाज शुरू किया था।

इसके साथ ही कांग्रेस सरकार में भी यह नियम बनाया गया कि जो रेगुलर भी रखे जाएंगे या जो ठेके की नौकरी करते रेगुलर हो जाएगे उन्हें पहले तीन साल केवल बेसिक वेतन मिलेगा। जो जवानी के शोषण का एक नया कानूनी हथियार सरकारों ने अपना लिया। विधायक और मंत्री को तो पहले दिन से ही पूरा वेतन, भत्ते और सारे सरकारी लाभ मिलते हैं पर कर्मचारियों को नहीं। पंजाब की जनता को यह जरूर याद रखना चाहिए कि जब अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री 2002 में बने तभी यह ठेके की नौकरी अर्थात ठेके के शोषण की चक्की पंजाब में चलाई गई थी।












