
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत के स्वास्थ्य मंत्री के ध्यान में यह लाना चाहती हूं कि अधिकतर अस्पतालों में आईसीयू अर्थात इंटेंसिव केयर यूनिट के नाम पर रोगियों से धोखा हो रहा है। रोगी के परिवार को भी मानसिक यातना मिलती है। उनका रुपया लुटता है और दरवाजे के बाहर तो यह सख्ती रहती है कि आईसीयू में मरीज के रिश्तेदार दिन में एक या दो बार जा सकते हैं, पर अंदर क्या हो रहा है इसे कोई नहीं देखता। आईसीयू में एक रोगी से दूसरे रोगी का बिस्तर कितनी दूर होना चाहिए, कितने गंभीर रोगियों के लिए एक डाक्टर चाहिए। कितनी नर्सें हर समय आईसीयू में तैनात रहनी चाहिए और अगर किसी रोगी की मृत्यु हो गई तो उसे कितने समय के अंदर ही वहां से ले जाना चाहिए और जिस बेड पर गंभीर बीमारी के रोगी की मृत्यु होती है उस बेड और बिस्तर को बदल देना चाहिए या नहीं या उसी पर दूसरे मरीज को डाल देना चाहिए, इसका उत्तर देने वाला कोई नहीं।

कुछ वर्ष पहले मैंने आईएमए को इस विषय में कम से कम तीन पत्र लिखे। समाचार पत्रों में भी आईसीयू की बुरी हालत और रोगियों के परिवारों द्वारा पीड़ा मिलने के विषय में लिखा। अफसोस कि देश की इतनी बड़ी संस्था आईएमए उन्होंने देश के एक नागरिक को और जो व्यक्ति पहले स्वास्थ्य मंत्री रह चुका है उसे उत्तर देना ठीक नहीं समझा। मेरा भारत के स्वास्थ्य मंत्री से निवेदन है कि वैसे तो पूरे देश में ही करवाइए, पर पंजाब के अस्पतालों में आईसीयू के नाम पर जो धंधा चल रहा है उसका सुपरविजन भी करवाएं और वहां की व्यवस्था ठीक करवाएं। आईसीयू में जैसी भीड़ रहती है वह तो जनरल वार्ड में भी ठीक नहीं।











