
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। किड्स पब्लिक स्कूल में पिछले 24 वर्षों से हमारी शिक्षा प्रणाली का मूल आधार हमारी प्राचीन भारतीय विरासत, योग रहा है। हम इसे केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं मानते, बल्कि एक वैज्ञानिक जीवन शैली के रूप में देखते हैं जो छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

किड्स पब्लिक स्कूल की प्रिं. आरती सूद मेहता की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष प्रस्तुति
आज के इस अत्यधिक तकनीक-उन्मुख युग में, बच्चे लगातार डिजिटल स्क्रीन, मोबाइल फोन और अन्य आधुनिक सुख-सुविधाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि उनमें शारीरिक निष्क्रियता, आलस्य, तनाव (डिप्रेशन और एंग्जायटी), और अवज्ञाकारी प्रवृत्ति बढ़ रही है। उनके खान-पान में भी बदलाव आया है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और वे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं। यह सब कहीं न कहीं आधुनिक भौतिकवादी युग की देन है जिसने दुर्व्यसनों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है।
हमारा दृढ़ विश्वास है कि इन चुनौतियों का सामना करने का सबसे प्रभावी तरीका योग है। योग का वास्तविक अर्थ है संयम और अनुशासन। यह सिर्फ कुछ आसन करना नहीं, बल्कि नियंत्रित और संयमित जीवन शैली अपनाना है। जैसा कि सदियों से कहा जाता रहा है, “जो तप गया, वह बन गया” – यह सिद्धांत शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर आत्म-नियंत्रण के महत्व पर जोर देता है।
योग के माध्यम से, हम बच्चों में मानसिक दृढ़ता विकसित करते हैं, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य का आधार है। एक मजबूत मन ही स्वस्थ शरीर को जन्म देता है। *किड्स पब्लिक स्कूल में, हमारा उद्देश्य* *योग के वैज्ञानिक सिद्धांतों का* *उपयोग करके बच्चों का संपूर्ण व्यक्तित्व* *विकास करना है* । हम उन्हें ऐसे जिम्मेदार, अनुशासित और स्वस्थ नागरिक बनाना चाहते हैं जो आधुनिक दुनिया की जटिलताओं का सामना आत्मविश्वास और संयम के साथ कर सकें। योग उन्हें सही मार्ग पर बनाए रखने और एक सफल व संतुष्ट जीवन जीने में सहायता करता है।
*भारतीय सरकार द्वारा योग को खेल* *का दर्जा*
यह गर्व का विषय है कि हमारी भारत सरकार ने योग के महत्व को समझते हुए इसे एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में औपचारिक मान्यता दी है। दिसंबर 2020 में, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने योगासन (Yoga asanas) को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में शामिल किया। यह निर्णय योग को केवल एक आध्यात्मिक या कल्याणकारी अभ्यास से ऊपर उठाकर, उसे एक ऐसी विधा के रूप में स्थापित करता है जहाँ प्रदर्शन, कौशल और प्रतियोगिता का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
इस मान्यता का अर्थ है कि अब योग भी अन्य पारंपरिक खेलों की तरह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना सकेगा। खेलो इंडिया यूथ गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में जोड़ा गया है, जिससे युवा खिलाड़ियों को इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने का अवसर मिलेगा। यह कदम न केवल योग के प्रचार-प्रसार में सहायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे भारत अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक संदर्भ में ढालकर उसे विश्व मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। योग अब सिर्फ व्यायाम नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्मबल और अनुशासन का संगम है जिसे खेल के रूप में अपनाया जा रहा है।












