
होशियारपुर में पिछले कुछ माह से एक डाक्टर द्वारा रिहायशी नक्शे पर बनाई जा रही कमर्शियल इमारत का मामला गर्माया हुआ है तथा आप में एक डाक्टर मंत्री इसका काम पूरा करवाने में पूरा-पूरा इंटरस्ट ले रहा है तथा पता चला है कि मंत्री जी की घुड़की के चलते कोई भी डाक्टर पर कार्यवाही करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है, जबकि सभी जानते हैं कि इमारत सरासर नियमों के विपरीत और आने वाले समय में किसी बड़े हादसे के कारण से कम नहीं है। बावजूद इसके बिरादरी का साथ देने का नियम निभाते हुए डाक्टर मंत्री द्वारा अपने डाक्टर भाई का साथ कुछ इस कद्र दिया जा रहा है कि उसकी एवज में और कई लोगों की इमारतों की तरफ देखने की मनाही कर दी गई है। एक और मामला उस समय ध्यान में आया जब सरकार कालेज के सामने रिहायशी नक्शे पर बन रही कमर्शियल इमारत का काम रुकवाए जाने के बावजूद उसका का निर्विघ्न जारी है। इतना ही नहीं उसके बारे में कुछेक समाचार पत्रों द्वारा मामला उजागर किए जाने के बावजूद अधिकारी वर्ग के हाथ कुछ इस तरह से बांध दिए गए हैं कि वह चाह कर भी कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे।

स्टैलर चुटकी
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जब सरकार होती है तो उसमें कई बातें ढक जाती हैं और अकसर ही लोगों की आस होती है कि जिस नेता का उन्होंने साथ दिया है वह उनकी इतनी मदद तो कर ही सकता है। लेकिन बात यहां साथ देने की नहीं बल्कि गलत का साथ देने की है। कहा गया है कि आटे में लूण तो चलता है, मगर लूण गबंथना सही नहीं होता। अगर कोई कमर्शियल नक्शा पास करवाकर एकाध मंजिल अधिक बना लेता है या पार्किंग कम छोड़ता है तो उसे नज़रअंदाज किया जा सकता है कि चलो उसने सरकार को सीएलयू व अन्य फीस देकर ही काम किया होगा। मगर, यहां तो लूण गूंथने का काम किया जा रहा है और वह भी रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल इमारत का निर्माण करके। सूत्रों से पता चला है कि मौके की सरकार और ऊपर से मंत्री का दवाब तो ऐसे में होशियारपुर ही क्या पूरे पंजाब में किसकी मजाल जो उनके हुक्म के विपरीत जाए।
अब सवाल है कि क्या यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता, अगर आता है तो ऐसे मामलों में कट्टर ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार, हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अपने मंत्रियों पर कार्यवाही क्यों नहीं करती। कितना हास्यपद है कि जिस व्यक्ति ने रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल इमारत का निर्माण कर लिया उसे कुछ नहीं कहा गया और विभाग ने अपने ही एक अधिकारी को सस्पेंड करके अपने फर्ज की इतिश्री कर ली। जिसे लेकर भी आम शहरियों में चर्चाओं का बाजार आज कत गर्म है और सभी का कहना है कि सरकार व अधिकारी भी कमजोर कड़ी ढूंढकर उसे बलि का बकरा बनाने से परहेज नहीं करते और उक्त मामले में यही सब सामने आया है।
अब भले ही उक्त इमारत के मालिक द्वारा कहा जा रहा हो कि वह उक्त इमारत को घर के लिए ही प्रयोग करेगा, लेकिन जो उसका आकार एवं निर्माण विधि है उससे साफ है कि आने वाले समय में वह पूरी तरह से कमर्शियल प्रयोग में लाई जाएगी तथा इसके पीछे छिपी मंशा को जहां सरकार को पहचानने की जरुरत है वहीं अधिकारियों को भी सख्त रुख अपनाते हुए कार्यवाही हेतु आगे आना समय की जरुरत है। अब देखना यह होगा कि सरकार या अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और मौके के मंत्री जी का इस पर क्या रुख रहता है। हमें दें इजाजत। जय राम जी की।












