
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़): योगेश्वर स्वामी मुलख राज जी महाराज का चार दिवसीय जन्म उत्सव समारोह आज योग भवन डगाना रोड पर हर्षोल्लास से शुरू हुआ। हवन आरती के उपरांत भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि महापुरुषों के जन्म दिवस सांसारिक कर्मों द्वारा नहीं मनाए जाते बल्कि उनकी शिक्षाओं को याद करके मनाए जाते हैं। हम इस दिन संकल्प करते हैं कि हम उनके बताए रास्ते पर चलेंगे।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शिष्य गुरु से प्रेम करते हैं इसी प्रकार गुरु भी शिष्य से इतना प्रेम करते हैं कि उसे रास्ता भटकने नहीं देते। उन्होंने कहा कि कलयुग में योग की विद्या को प्रभु रामलाल जी ने फिर से हमारे बीच रखा। इसी विद्या का प्रसार स्वामी मुलख राज जी ने उनके आशीर्वाद से किया। उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य को कुम्हार की तरह सजाते हैं, बाहर से अगर थप थपाते हैं तो अंदर से हाथ भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि शिष्य को यह समझना चाहिए कि गुरु अगर उनसे कोई मुश्किल काम भी कहता है तो वह उसकी भलाई के लिए ही कहता है।
शिष्य का गुरु के प्रति अगाद प्रेम होना चाहिए। उसे गुरु के प्रति पूरी तरह से समर्पित होना चाहिए। केवल गुर चरणों की सेवा ही मांगनी चाहिए क्योंकि सांसारिक वस्तुएं उसका कल्याण नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि हम सब धन्य है कि हमें हमारे सदगुरु देव योगेश्वर चमन लाल जी महाराज का सानिध्य मिला जो स्वामी मुलख राज जी के परम शिष्य रहे थे। आज भी उनकी शिक्षाएं हमारा मार्गदर्शन कर रही है। जो भक्त समर्पित भाव से गुरु के वचनों का पालन करते हैं वह लोक और परलोक दोनों स्थानों पर सुखी रहते हैं। इस उपरांत योग दिव्य रामायण का अखंड पाठ शुरू हुआ। फोटो कैप्शन: प्रवचन करते मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी तथा उपस्थिति।











