Saturday, October 31, 2026
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बेटियों के गौरव और सम्मान की सुरक्षा का संकल्प है लोहड़ीः सज्जनानंद

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, गौतम नगर आश्रम, में ‘बेटियों की लोहड़ी’ के उपलक्ष्य में एक भव्य आध्यात्मिक महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के प्रचारक स्वामी सज्जनानंद जी ने लोहड़ी के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व केवल अग्नि पूजन या ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह बेटियों के गौरव और सम्मान की सुरक्षा का संकल्प है। उन्होंने पंजाब के ऐतिहासिक नायक ‘दुल्ला भट्टी’ की लोकगाथा का स्मरण कराते हुए बताया कि जिस प्रकार उन्होंने ‘सुंदरी-मुंदरी’ जैसी बेटियों के धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया, वही रक्षा-भाव आज समाज को अपनी बेटियों के प्रति जागृत करने की आवश्यकता है।

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उन्होंने इस पावन समय (पौष मास) को दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके साहिबजादों के महान बलिदान से जोड़ते हुए समझाया कि गुरु महाराज ने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपना ‘सरबंस’ दान कर दिया, ताकि समाज में निर्बलों और मासूमों का दमन न हो, इसलिए आज के उत्सव का सच्चा अर्थ तभी सार्थक है जब हम कन्या भ्रूण हत्या जैसी राक्षसी कुरीतियों को त्यागकर अपनी बेटियों को भी वही ‘चढ़दी कला’ और साहस प्रदान करें।

इसी वैचारिक धारा को आगे बढ़ाते हुए साध्वी शंकरप्रीता भारती जी ने अत्यंत मार्मिक व आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि भारत वह पुण्य भूमि है जहाँ सदियों से नन्हीं कन्याओं को साक्षात् ‘कंजका’ मानकर पूजा जाता रहा है, किंतु आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में गर्भस्थ शिशुओं की धड़कनों को अस्पताल की नालियों में बहा देना मानवता के माथे पर एक कलंक है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि वे केवल ‘आँचल में दूध और आँखों में पानी’ वाली अबला की छवि त्याग कर माता जीजाबाई और झाँसी की रानी वाली ‘सबला’ का स्वरूप धारण करें, क्योंकि जिस देश में ‘गायत्री’ को मंत्र, ‘गौ’ को मन और ‘गंगा’ को प्राण माना जाता है, वहाँ नारी का अपमान समूची संस्कृति का पतन है; अतः जैसे गंगा की निर्मलता के लिए प्रयास हो रहे हैं, वैसे ही बेटियों के अस्तित्व की सुरक्षा के लिए आत्मिक जागरण अनिवार्य है।

कार्यक्रम के अंत में पवित्र लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ समाज से बुराइयों की आहुति देने का संकल्प लिया गया और यह प्रार्थना की गई कि गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के ज्ञान की ऊष्मा हर हृदय में बेटियों के प्रति सम्मान का प्रकाश फैलाए।

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