Wednesday, October 21, 2026
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बांग्लादेश चुनाव 12 फरवरी: हिंसा, अल्पसंख्यक संकट और हसीना-अवामी लीग बाहर

असम (द स्टैलर न्यूज़), नव ठाकुरीया। लगातार राजनीतिक अस्थिरता के बीच बांग्लादेश 12 फरवरी 2026 को 13वीं जातीय संसद के लिए चुनाव कराने जा रहा है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है, जिससे मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। यह चुनाव जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनविद्रोह के बाद हो रहा है, जिसमें हसीना सरकार गिर गई थी और व्यापक हिंसा में 1,400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

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इस उथल-पुथल के बाद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डा. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी, जिसका प्रमुख दायित्व निष्पक्ष चुनाव कराना है। वर्ष 2009 से सत्ता में रहीं शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बड़े विद्रोह के दौरान देश छोड़कर भारत आ गईं और फिलहाल दिल्ली में अस्थायी शरण लिए हुए हैं। हाल ही में एक बांग्लादेशी अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया है। यूनुस प्रशासन उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जिससे भारत–बांग्लादेश संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया है।

बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, 51 राजनीतिक दलों के 1980 उम्मीदवार 299 संसदीय सीटों के लिए मैदान में हैं। एक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान स्थगित किया गया है। चुनाव में केवल 78 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार हैं, हालांकि संसद में महिलाओं के लिए 50 सीटें आरक्षित हैं, जिन्हें अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से भरा जाएगा। कुल 12,77,11,895 मतदाता मतदान के पात्र हैं, जिनमें 45 लाख से अधिक नए युवा मतदाता शामिल हैं। चुनावी प्रक्रिया के दौरान लगभग 9 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है।

हालांकि, चुनाव से पहले का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उभरे युवा नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद हालात और बिगड़ गए। अफवाहें फैलीं कि हत्यारे भारत भाग गए हैं, जिससे भारत-विरोधी और अल्पसंख्यक-विरोधी भावनाएं भड़क उठीं। इसके बाद देशभर में गैर-मुसलमानों पर हमलों की घटनाएं सामने आईं, जिससे ढाका और नई दिल्ली के बीच राजनयिक तनाव और गहरा गया।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर 2,900 से अधिक हमलों की घटनाएं दर्ज की गई हैं। हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों के खिलाफ हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और महिलाओं के साथ अपराधों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बीते वर्ष 520 से अधिक सांप्रदायिक हमलों में 60 से ज्यादा गैर-मुसलमान मारे गए, जबकि बलात्कार और अन्य हिंसक घटनाओं के दर्जनों मामले सामने आए।

जनवरी 2026 में शेख हसीना ने यूनुस सरकार को “गैर-कानूनी और हिंसक” करार देते हुए उस पर तीखा हमला किया। इसके जवाब में बांग्लादेश सरकार ने भारत पर आरोप लगाया कि वह हसीना को शरण देकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा रहा है। इस बयानबाजी ने पहले से तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल बना दिया है।

ढाका के स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में चुनाव लंबे समय से विवादों से घिरे रहे हैं और अवामी लीग की अनुपस्थिति अभूतपूर्व नहीं है। पिछले तीन राष्ट्रीय चुनावों से BNP दूर रहती थी । भारत में हसीना की मौजूदगी (भारत के साथ समस्या यह थी कि सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दल बांग्लादेश को सिर्फ हसीना की नज़रों से देखना पसंद करते थे) और अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा ने इस चुनाव को केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं रहने दिया है। ऐसे में 12 फरवरी का चुनाव सिर्फ एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह परीक्षा भी है कि क्या हिंसा, अस्थिर राजनीति और गहरे सामाजिक विभाजन के बीच बांग्लादेश में शांति और स्थिरता लौट पाएगी या नहीं।

(लेखक पूर्वोत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार)

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