
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-रजनीश शर्मा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में मजबूत पहचान रखने वाले प्रेम कुमार धूमल का जन्म 10 अप्रैल 1944 को हमीरपुर जिले में हुआ। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने पहले जीवन बीमा निगम में नौकरी की, फिर कानून की पढ़ाई कर प्रोफेसर बने, लेकिन उनका मन जनसेवा और राजनीति में रमा रहा।

भाजपा से जुड़कर उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी पहचान बनाई और 1993 के बाद प्रदेश राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1998 में बमसन विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत दर्ज कर वे पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2003 तक सफल कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा दी।
इसके बाद 2008 में एक बार फिर सत्ता में वापसी करते हुए उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला और 2012 तक प्रदेश का नेतृत्व किया। धूमल को एक सशक्त प्रशासक और संगठन को मजबूत करने वाले नेता के रूप में जाना जाता है।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया, लेकिन सुजानपुर सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजनीति में यह एक बड़ा मोड़ था, जब अपने ही शिष्य से उन्हें पराजय मिली।
आज भले ही वे सक्रिय राजनीति में कम नजर आते हों, लेकिन हिमाचल की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और प्रभाव आज भी कायम है। उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्ष, नेतृत्व और उतार-चढ़ाव की एक ऐसी कहानी है, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती है। धूमल ने प्लास्टिक के लिफाफों पर बैन लगा प्रदेश को पर्यावरण सुरक्षा प्रदान की। धूमल सरकार का युग कर्मचारी, मजदूर, पेंशनर, व्यापारी, किसान, बागवान एवं युवा हितैषी रहा। डबल इंजन की सरकार और केंद्र से हमेशा मधुर संबंधों के कारण प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश के विकास में कई मील पत्थर स्थापित किए जिनकी बदौलत आज भाजपा की पहचान प्रदेश के कोने कोने में है।












