
दातारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। आज के भागम भाग भरे समय में जबकि रिश्तों की डोर टूट रही है। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल में भी कुछ लोग कोताही बरतने से गुरेज नहीं करते। बड़े बुजुर्गो को घरों में ही प्रताड़ित किया जाता है। और कुछ का तो वृद्धाश्रम ही सहारा बन जाता है। और यही उनकी तकदीर बना जाती है। वहीं कुछ लोग अपने अच्छे काम और अच्छी सोच से दूसरों के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं, प्रेरणा बन जाते हैं।
ऐसा ही प्रकरण दातारपुर के रकड़ी निवासी पंडित सतेंद्र भारद्वाज ने प्रस्तुत किया है। सतेंद्र भारद्वाज उच्च कोटि के ज्योतिषाचार्य हैं।वेद शास्त्र के मर्मज्ञ हैं।इन दिनों कैलिफोर्निया में रहते हैं। लेकिन अपने गांव की सोंधी मिट्टी की महक से भी लगातार जुड़े रहते हैं। सतेंद्र भारद्वाज साल में तीन बार गांव आते हैं। धार्मिक आयोजन करवाते हैं। गांव में पुश्तैनी जमीन पर खेती भी करते हैं। दातारपुर में ही उनके कुलदेवी की देहरी मां का भव्य मंदिर है।

पंडित सतेंद्र भारद्वाज ने संकल्प लिया कि स्वर्गीय माता शीला देवी तथा पिता स्वर्गीय तीर्थ राम की स्मृति में यहां विशाल सत्संग भवन का निर्माण करूंगा। उन्होंने तेईस लाख रुपए व्यय किए और भव्य भवन का निर्माण करवाया और उसका विधिवत वेदमन्त्रों द्वारा उद्घाटन किया। इस अवसर पर मां कामाक्षी दरबार कमाही देवी के तपोमूर्ति महंत राज गिरि जी महाराज ने उदघाटन पट्टिका का अनावरण किया। इस अवसर पर विशाल भंडारा लगाया गया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिरकत की और प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर तपोमूर्ति महंत राज गिरि जी महाराज ने उपस्थिति को कहा कि हरेक व्यक्ति पर माता पिता,समाज और राष्ट्र का ऋण होता है।जिसे हम सत्कर्म करते हुए उतार सकते हैं।
महंत जी ने कहा आजकल लोग मां बाप को बुढ़ापे में बोझ समझते हैं उन लोगो को सतेंद्र भारद्वाज से प्रेरणा लेकर अपने बड़े बुजुर्गो का सम्मान करना चाहिए। पंडित सतेंद्र भारद्वाज ने कहा कि मेरे मन में अपनी माता शीला देवी, एवं पिता तीर्थ राम की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भावना थी।आज मैं अपने आप को धन्य समझता हूं कि मुझे मेरे माता-पिता का ही आशीर्वाद प्राप्त हुआ है।












