Sunday, October 25, 2026
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तुलसी भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य प्रतीक: संजीव अरोड़ा

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत विकास परिषद की ओर से प्रधान एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा के नेतृत्व में श्री गोपाल मंदिर, जालंधर रोड में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ तुलसी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के पुजारी पंडित सतीश मिश्रा द्वारा विधिवत तुलसी वंदना, वैदिक मंत्रोच्चारण एवं मंगलाचरण के साथ किया गया। इस अवसर पर भारत विकास परिषद के प्रधान संजीव अरोड़ा ने कहा कि भारत विकास परिषद अपने पंचसूत्र संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा एवं समर्पण को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर जनकल्याणकारी एवं संस्कार आधारित कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। तुलसी वितरण कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका उद्देश्य लोगों को भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है और श्री अरोड़ा ने कहा कि तुलसी में अनेक औषधीय गुण विद्यमान हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सर्दी-जुकाम, खांसी एवं अन्य अनेक रोगों से बचाव में सहायक होते हैं। आयुर्वेद में तुलसी को प्राकृतिक औषधि का दर्जा प्राप्त है। इसके अतिरिक्त तुलसी वातावरण को शुद्ध करने तथा प्रदूषण को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने सभी परिवारों से अपने घर में कम से कम एक तुलसी का पौधा अवश्य लगाने तथा बच्चों को भी इसके धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराने का आग्रह किया। संजीव अरोड़ा ने आगे कहा कि सनातन धर्म में भगवान श्री विष्णु एवं श्रीकृष्ण की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। मंदिरों में श्रद्धालुओं को वितरित किए जाने वाले चरणामृत में भी तुलसी दल का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी युक्त चरणामृत न केवल आध्यात्मिक रूप से पवित्र माना जाता है, बल्कि इसमें औषधीय गुण भी निहित होते हैं, जो शरीर एवं मन दोनों के लिए लाभदायक हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार तुलसी का पौधा लगाकर उसकी नियमित सेवा करे तो यह हमारी संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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इस अवसर पर सचिव रजिंद्र मोदगिल ने कहा कि भारत विकास परिषद सेवा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना समय की आवश्यकता है। तुलसी वितरण जैसे कार्यक्रम समाज में प्रकृति के प्रति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण तथा आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष लोकेश खन्ना ने उपस्थित श्रद्धालुओं को तुलसी के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में तुलसी को माता का स्वरूप माना गया है। जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा, पवित्रता और सुख-समृद्धि का वास माना जाता है। उन्होंने कहा कि तुलसी केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान परिषद के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक तुलसी के पौधे प्राप्त किए तथा उन्हें अपने घरों एवं आसपास के स्थानों पर लगाने का संकल्प लिया। उपस्थित सभी लोगों ने भारत विकास परिषद की इस जन-जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण की पहल की मुक्त कंठ से सराहना की और भविष्य में भी परिषद के सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का विश्वास दिलाया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति, सेवा और भारतीय संस्कृति के संदेश के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर रजिंद्र मोदगिल, डा. गुरधीर जसवाल ,अश्वनी कुमार दत्ता , लोकेश खन्ना, दीपक  नरूला, तरसेम मोदगिल, जगदीश अग्रवाल, दीपक मेंहदीरत्ता, अमरजीत शर्मा, अजय चावला, रविंद्र भाटिया, वरिंदरजीत व अन्य उपस्थित थे।

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