
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम अपने मन को योग के उपदेशों की तरफ लगाएं तभी सत्संग में आने का लाभ हो सकता है। हम अपने जीवन में अगर अपरिग्रह अर्थात सादगी के गुण को अपनाए तो हमारा सांसारिक, आध्यात्मिक और आंतरिक जीवन सुखी हो सकता है।

मानव जीवन हमें विकास करने के लिए मिला है। अपरिग्रह के गुण से हमारा विकास भी होगा। जिन्होंने जीवन में बड़े-बड़े काम किए हैं उनका जीवन भी सादगी से भरा हुआ था। सादगी से बंधन कम होते हैं। हमने जीवन के अंदर तीन प्रकार का विकास करना है। हम जो सांस भी अंदर लेते हैं वह जीवित रहने के लिए नहीं बल्कि विकास के लिए लेना है। प्राण मन तथा बुद्धि तीन शक्तियों हमें मिली है। प्राणायाम में प्राणों के लिए आठ कुंभक बताए गए हैं। इससे नाड़ीयों में शक्ति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि मन की सोच भी संकुचित नहीं होनी चाहिए। योगी हमें रास्ता दिखाते हैं कि अपने मन का विकास करो। केवल संसार तक ना सोचे बल्कि ब्रह्म तक अपनी सोच रखें। ब्रह्म के आगे सब कुछ खत्म हो जाता है। पृथ्वी आकाश की तो सीमा हो सकती है लेकिन ब्रह्म की कोई सीमा नहीं होती। योगी को प्रकाश ही प्रकाश दिखाई देता है। प्रकाश ही बुद्धि का विकास है।











