
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। स्वास्थ्य विभाग पंजाब के आदेशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार, विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 12 मार्च से 18 मार्च तक ‘चलो अदृश्य ग्लूकोमा को हराएं’ थीम के तहत मनाया जा रहा है। इस दौरान काला मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की नि:शुल्क जांच की जा रही है। जिले में ग्लूकोमा सप्ताह की शुरुआत कार्यकारी सिविल सर्जन डॉ.पवन कुमार ने सिविल अस्पताल होशियारपुर के आँखों के विभाग में आयोजित चेकअप कैंप और जागरूकता कार्यक्रम द्वारा की।

काला मोतियाबिंद के बारे में जानकारी साझा करते हुए डॉ.पवन कुमार ने कहा कि ग्लूकोमा भारत में स्थायी अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में कुल अंधे लोगों में से 12 प्रतिशत मोतियाबिंद के कारण अंधेपन से पीड़ित हैं। ग्लूकोमा के लक्षणों में असामान्य सिरदर्द या आंखों में दर्द, पढ़ने के चश्मे का बार-बार बदलना, प्रकाश के चारों ओर रंगीन घेरे, आंखों में दर्द और लाली के साथ दृष्टि की अचानक हानि, और दृष्टि क्षेत्र का संकुचित होना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के लक्षण दिखने पर उन्हें अपनी आंखों के प्रेशर की जांच करानी चाहिए, क्योंकि ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) का समय रहते पता चल जाने पर इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। इसलिए नजदीकी अस्पताल में नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं ।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोख राम ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि अगर किसी का कोई रिश्तेदार ग्लूकोमा से पीड़ित है, किसी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या कोई एलर्जी, अस्थमा, त्वचा रोग आदि के लिए स्टेरॉयड का उपयोग करता है, तो वह व्यक्ति ग्लूकोमा से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को वर्ष में एक बार अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए ताकि समय पर उपचार संभव हो सके।
उन्होंने शिविर के दौरान उपस्थित लोगों को संदेश देते कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा आंखों में नहीं डालनी चाहिए। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान सिविल अस्पताल की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. स्वाति शिमार, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनमोहन सिंह, जिला मास मीडिया अधिकारी प्रषोत्तम लाल, डिप्टी मास मीडिया अधिकारी रमनदीप कौर, ज़िला बी.सी.सी अमनदीप सिंह, नर्सिंग अधिकारी जसवीर कौर, नेत्र रोग अधिकारी सुजीव लूथरा, स्टाफ नर्स रमणीक आदि मौजूद थे।












