
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब फ़ूड एंड सिविल सप्लाई विभाग के दो अधिकारियों ने बाघापुराना के एक शेलर मालिक को घूस/रिश्वत न देने पर बर्बादी के कगार पर लाकर छोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि उक्त शेलर को ब्लैक लिस्ट करते हुए भी उक्त अधिकारियों ने सभी नियमों को ताक पर रखकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए गांव लांडे (बाघा पुराना) स्थित सरां राइस मिल के मालिक रोहित मित्तल ने अपनी दर्दभरी कहानी सुनाते हुए कहा कि 2019 में विभाग के निदेशक व फूड सचिव ने उनके शेलर मालिक रोहित मित्तल को यह कहकर कि उनके शेलर में सरकारी खरीद से करीब 33 हजार बोरी धान अधिक है, जिस कारण तीन साल के लिए उनके शैलर को ब्लैक लिस्ट कर दिया था।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों से संपर्क कर स्पष्ट किया गया था कि यह धान निजी खरीद का है और जिसकी मंडी फीस नियमित रूप से अलग अलग बैंकों में जमा की जाती है। जिसके प्रमाण अधिकारियों ने उनकी सहमति के बिना ही बैंकों से बयान लेकर मामले में संलग्न कर दिये हैं। उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारियों के निर्देश पर जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया था कि अतिरिक्त धान निजी खरीद का था, लेकिन वे फिर भी नहीं माने। उन्होंने कहा कि जब सरकारी धान का स्टॉक पूरा है तो शेलर को ब्लैक लिस्ट करने का कोई मतलब ही नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उक्त अधिकारी इस बात पर अड़े रहे कि इस धान को खुले बाजार/मार्किट में बेचा जाए, लेकिन उक्त अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उक्त धान की बिक्री से प्राप्त धन का क्या किया जाता। श्री मित्तल ने कहा कि दरअसल उक्त अधिकारियों ने उनसे 40 लाख रुपये की मांग की थी, जिसके एवज में वे धान बेचना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इसी रंजिश के तहत उक्त अधिकारियों ने उनकी मां के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया, जबकि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि उनकी मां न तो शैलर में हिस्सेदार हैं और न ही कोई और सम्बन्ध है, तो उनके खिलाफ मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब वह इस मामले को माननीय अदालत में लाए थे, तो माननीय अदालत ने शेलर को यथास्थिति (स्टेट्स-को) देकर अधिकारियों के शैलर को ब्लैकलिस्ट करने फैसले को खारिज कर दिया।
उसके मुताबिक उसके बाद भी उक्त अधिकारी चैन के साथ नहीं बैठे और अपने दो दलालों के साथ मिलकर उसके शेलर से दो ट्रक धान की गायब कर दी, जिसमें उसका अपना बारदाना था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस चोरी के संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई तो उक्त अधिकारियों ने पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि उनका मामला विजीलेंस (सतर्कता) विभाग के पास विचाराधीन है, इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर उन्हें न्याय दिया जाए।











