
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। 2011 में पंजाब के स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजाब की सेवा के लिए एंबुलेंस 108 सेवा शुरू की गई। स्वयं सरकारी आंकड़े यह बताते हैं कि इतने वर्षों में हजारों लोगों की प्राण रक्षा में इस एंबुलेंस ने काम किया। विशेषकर जो महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पतालों में पहुंचना चाहती थीं पर एंबुलेंस का प्रबंध नहीं कर पाते थे उनके लिए यह वरदान साबित हुआ और सैकड़ों बच्चे तो एंबुलेंस में कर्मचारियों के सहयोग के कारण ही सुरक्षित जन्म ले पाए। ये कर्मचारी बिल्कुल अनाथ से हैं।

न उनका वेतन बढ़ा है, न छुट्टी और न ही कोई ऐसी सुविधा जो सरकारी कर्मचारियों को मिलती है। पंजाब सरकार से पहले भी यह आग्रह किया था कि हरियाणा पैटर्न पर 108 के कर्मचारियों को संरक्षण दिया जाए, पर ऐसा नहीं किया गया। एक बार फिर सरकार से यह आग्रह है कि जो दूसरों के जीवन की रक्षा का काम कर रहे हैं उन 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों की रोटी रोजी की रक्षा की जाए।
उन्हें छुट्टी दी जाए और काम के घंटे जो बहुत ज्यादा हैं उन्हें ठीक किया जाए। इसके साथ ही एमएमयू अर्थात मोबाइल मेडिकल यूनिट के कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के रहम पर छोड़ा हुआ है। पिछले छह वर्षों से उनका वेतन नहीं बढ़ा और न ही उन्हें रेगुलर करने के लिए या सरकारी सेवा में लेने के लिए सरकार कोई प्रयास कर रही है। उनको भी पूरी रोटी दी जाए और छुट्टी तथा अन्य लाभ जो सरकारी कर्मचारियों को मिलते हैं वे सुनिश्चित किए जाएं।











