
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि मानव जीवन हमें मोक्ष प्राप्त करने के लिए मिला है। लेकिन इसके लिए हमें कुछ उपाय भी करने पड़ते हैं। केवल इच्छा करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। हम घर की चार दिवारी में आंधी बारिश आदि से सुरक्षित रहते हैं। परंतु फिर भी हम सुखी नहीं है। कई चिंताएं हमें घेरे रहती हैं। इसी प्रकार आदि भौतिक/आदि दैहिक, आदि दैविक और आध्यात्मिक दुःख का भी हमें ध्यान रखना होगा। आदि भौतिक होता है संसार का दुःख। सुख के लिए धन भी एक पहलू है जिसे हासिल करने के लिए शिक्षित होना जरूरी होता है। मनुष्य केवल धन से ही सुखी नहीं हो जाता। धन को धर्म अनुकूल खर्च करो, अगर धर्म के कार्य में लगाएंगे तो सुख मिलेगा। अगर हम धन को गलत कार्य में लगाएंगे तो यह सुख का नहीं दुख का कारण बन जाएगा। आदि दैहिक का मतलब है कि हमारा शरीर भी ठीक होना चाहिए।

अगर शरीर ठीक नहीं होगा तो पैसा भी किसी काम नहीं आएगा। आज बहुत से लोग शारीरिक तौर पर दुखी है। योग के साधन करने से शारीरिक दुखों को आने से रोका जा सकता है। कई बार शरीर भी ठीक होता है पैसा भी होता है लेकिन फिर भी मन अशांत रहता है। इसको आदि दैविक कहते हैं। मन हमारे शरीर का देवता है। इसको साधने का मतलब यह है कि हमने देवता को साध लिया। अभ्यास करने से मन पानी से बर्फ बनने की तरह ठंडा हो जाता है फिर वह इधर-उधर नहीं हिलता। इसी तरह अगर आत्मा का उद्धार करना है तो आत्मा की आवाज को सुनो। जब हम कोई गलत काम करते हैं तो अंदर से आवाज आती है कि हम क्या कर रहे हैं। इसके अलावा।सिर पर गुरु का हाथ भी होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होती है।












