
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार्य सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है| बिना गुरु के व्यक्ति संसार में भटकता रहता है |इस संसार में सभी सुख की कामना करते हैं कोई दुख नहीं पाना चाहता और सच्चा सुख केवल गुरु ही दे सकता है |उसी से मोक्ष मिलता है| लेकिन देखा गया है कि गुरु वाले भी कई बार भटकते रहते हैं| क्योंकि, गुरु या तो उन्हें रास्ता नहीं दिखाता,| कई कथित गुरु खुद भ्रमित होते हैं| और शास्त्र कहते हैं कि हमारे सामने दुखों का पहाड़ है|

योग बताता है कि इससे कैसे बचा जा सकता है |भविष्य में आने वाले दुखों को हम टाल सकते हैं |उन्होंने कहा कि इस संसार में व्यक्ति को आध्यात्मिक दैविक और दैहिक दुख है| आध्यात्मिक दुख आत्मा का है| जब आदमी अंतिम अवस्था में होता है तो सोचने लगता है कि आगे क्या होगा |वह कहां पर जाएगा| इसके लिए योग कहता है कि पाप मत करो |किसी को धोखा मत दो |योग के यम नियमों का पालन करो |झूठ मत बोलो |किसी का मन ना दुखाओ। माया के पीछे मत भागो| लेकिन व्यक्ति बुढ़ापे को भूल जाता है| हम कुछ करते भी हैं तो यही सोचते हैं कि गुरु अपने आप देख लेंगे |लेकिन प्रयास तो हमें खुद करना होगा | दैविक दुख मन के अंतःकरण का है |मन के अंतरण को देवता कहते हैं जो सारे काम करता है, जो हमें ज्ञान देता , |जो हमें चला रहा है |अगर इसको दुख होता है तो इसे दैविक दुःख कहते हैं| मन की इच्छा बहुत बड़ी होती हैं| जब वह पूरी नहीं होती तो मन निराश हो जाता है |इसलिए योग कहता है की मन की इच्छाओं को ना बढ़ाओ |
संतोष का पालन करो| जो कुछ है उसी में सुखी रहो| इसी तरह दैहिक दुख शरीर के साथ जुड़े हुए हैं |आज संसार में बहुत सी बीमारियां ऐसी हैं जिनका इलाज मुश्किल है |हर कोई डायबिटिक हृदय रोग तथा रक्तचाप से जूझ रहा है| इसके लिए निरंतर दवाई खानी पड़ती है| लेकिन हम अगर समय रहते योग के साधन करें तो इन रोगों से बचा जा सकता है।












