
अमृतसर(द स्टैलर न्यूज़)। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांता चावला ने एक प्रैस विज्ञप्ति में कहा कि में चुनावों के मौसम में तो विशेषकर और पूरा वर्ष भी राजनीतिक दल जनता को बहुत से सब्जबाग दिखाते हैं और मुफ्त में राशन, बिजली, पानी आदि देने की घोषणाएं करते हैंं कुछ देते भी हैं। भारत की जनता यह सुनते सुनते थक चुकी है कि हम दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। इससे बड़ी गौरव की बात और कोई नहीं हो सकती कि भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बने, पर उस अर्थव्यवस्था का क्या लाभ जहां कुछ दर्जन लोग इतने अमीर हो जाएं कि भारत के सत्तर करोड़ लोगों की संपत्ति से ज्यादा उन दो दर्जन लोगों के पास हो। उस अर्थव्यवस्था से आम जनता के क्या लाभ जहां एक परिवार तो एक रात के कार्यक्रम के लिए नर्तकी को 72 करोड़ रुपये दे सकते हैं और गायक को पच्चीस तीस करोड़ से भी ज्यादा।

भारत की जनता चाहती है कि उन्हें सरकारें ऐसी व्यवस्था दें जिसमें हर व्यक्ति अपने परिवार का पालन, शिक्षा, दीक्षा सही करवा सके और बीमारी की हालत में उन्हें अनाथों की तरह हाथ फैलाकर दूसरों से सहायता न मांगनी पड़े। भारत सरकार और प्रदेशों की सरकारें यह बताएं कि जब वे किसी कर्मचारी को तीन सौ चार सौ रुपये प्रतिदिन के वेतन पर काम करवाते हों तो उन बेचारों को कई जन्मों तक पता नहीं लगेगा कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था बहुत शक्तिशाली हो गई है। भारत की जनता मु्फ्तखोरी नहीं चाहती। अपने हाथों की मेहनत से रोटी खाना चाहती है, इसलिए देश में ऐसी व्यवस्था बनाएं जहां हर हाथ को काम मिले और काम के पूरे दाम मिलें।












