
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। 140 करोड़ लोगों की प्रतिनिधि संस्था, लोकतंत्र का मंदिर भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में जो वक्तव्य राहुल गांधी ने दिया उसे सुनकर दुखद आश्चर्य हुआ। आशा की जाती थी कि विशाल देश भारत की समस्याओं, जन आकांक्षाओं और भविष्य के प्रति कोई योजना का वर्णन राहुल गांधी करेंगे, पर इसके विपरीत उन्होंने जो कुछ कहा उसकी कोई भी समझदार व्यक्ति प्रशंसा नहीं कर सकता। यह समझती हूं कि उसकी पार्टी और विपक्षी दल के लोगों को मजबूरी में ही अपने नेता के लिए तालियां लगानी पड़ीं, पर जो बचकाना भाषण राहुल गांधी ने दिया इससे बड़ी निराशा हुई।

ऐसा लगता है जैसे किसी में हिम्मत नहीं कि राहुल को बता सके कि यहां क्या कहना है या नहीं कहना। किसी में यह भी हिम्मत नहीं कि वह राहुल की जगह कांग्रेस पार्टी के किसी बुद्धिजीवी अनुभवी नेता को प्रतिपक्ष का नेता बना सकें। कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दल के सभी माननीय सदस्यों से भविष्य के लिए यह आशा रखी जाती है कि वे सत्र में भाषण देने से पहले अपने नेता को यह समझा सकें कि सदन में कितनी गंभीरता से और क्या क्या कहना चाहिए। इस बार देश विपक्ष के भाषण से पूरी तरह निराश हुआ।












