Sunday, October 18, 2026
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विजिलेंस ब्यूरो ने ईओ गिरीश वर्मा के फरार साथी गौरव गुप्ता को किया गिरफ्तार

चंडीगढ़, (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने शुक्रवार को पूर्व नगर पार्षद गौरव गुप्ता को नगर परिषद जीरकपुर के पूर्व कार्यकारी अधिकारी (ईओ) गिरीश वर्मा की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरीश वर्मा और उसके साथी संजीव कुमार निवासी खरड़ और पवन कुमार शर्मा निवासी पंचकूला को पहले ही विजिलेंस ब्यूरो गिरफ्तार कर चुकी है।  

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विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि मोहाली की अदालत ने इस मामले की आगे की जांच के लिए विजीलैंस ब्यूरो को गौरव गुप्ता का 4 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विजीलैंस ब्यूरो ने वर्ष 2022 में गिरीश वर्मा व अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में एफआईआर नंबर 18 दर्ज किया था। जांच के दौरान पाया गया कि गिरीश वर्मा ने अपनी पत्नी संगीता वर्मा व अपने बेटे विकास वर्मा के नाम पर 19 प्रमुख रिहायशी/व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी थी।

उन्होंने आगे बताया कि उक्त आरोपी गिरीश वर्मा जीरकपुर, खरड़, कुराली, डेराबस्सी आदि नगर परिषदों में ईओ के पद पर तैनात रहा और स्थानीय बिल्डरों/डेवलपर्स को गलत लाभ पहुंचाता रहा है। इसके बदले में वह उक्त बिल्डरों के खातों में से अपनी पत्नी व बेटे के नाम पर बैंक एंट्रीयां करवा कर अवैध के रूप में अवैध धन एकत्र करता था।
 

उन्होंने कहा, “इसके अलावा, गिरीश वर्मा के छोटे बेटे विकास वर्मा, जो विदेश में रह रहे हैं, को भी कुछ स्थानीय बिल्डरों और डेवलपर्स से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी जांच चल रही है। धोखाधड़ी से एकत्र पैसे का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था। प्रवक्ता ने बताया कि विकास वर्मा और संगीता वर्मा के पास अवैध धन से खरीदी गई संपत्तियों के किराए के अलावा आय का कोई वैध स्रोत नहीं था।

प्रवक्ता ने बताया कि  उक्त विकास वर्मा वर्ष 2019-20 में रियल एस्टेट फर्म ‘बालाजी इंफ्रा बिल्डटेक’ और ‘बालाजी डेवलपर्स’ में अपने पिता के काले धन को सफेद करके और इन फर्मों में अन्य भागीदारों से असुरक्षित ऋण के रूप में बैंक एंट्रीयां दिखा कर और फिर उक्त फर्मों के साझेदारों को नकद में पैसा वापस करके पैसे को जायज बनाने का उपाय करता था।

प्रवक्ता ने बताया कि विकास वर्मा के सह-आरोपी साझेदार, संजीव कुमार, गौरव गुप्ता और आशीष शर्मा, सभी कुराली के निवासी हैं, जो प्लॉट बेचने और आवासीय कॉलोनियों को गुप्त तरीके से नियमित करने के लिए पूर्वनिर्धारित समझौते तैयार करके धोखाधड़ी की गतिविधियों में लिप्त हैं।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि आरोपी गौरव गुप्ता इन फर्मों का संस्थापक है और बालाजी इंफ्रा बिल्डटेक में 80 प्रतिशत शेयर रखने वाला एक प्रमुख भागीदार है, जिसने खरड़ में कृषि भूमि खरीदने के लिए अन्य भागीदारों के साथ अपने शेयरों के रूप में करोड़ों रुपये का निवेश किया था और फिर इस भूमि पर अवैध रूप से आवासीय कॉलोनी का नियमन करवा लिया था। इसके बाद, उनके हिस्से का 15 प्रतिशत हिस्सा अंततः गिरीश वर्मा के बेटे विकास वर्मा को हस्तांतरित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि संजीव कुमार, गौरव गुप्ता और विकास वर्मा की अग्रिम जमानत पहले ही हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसके अलावा, संजीव कुमार ने अपनी जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली और गौरव गुप्ता और विकास वर्मा के खिलाफ मोहाली कोर्ट द्वारा पेशियों की कार्यवाही शुरू कर दी गई।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस मामले में एक अन्य आरोपी पवन कुमार शर्मा निवासी पंचकूला, जो एक कॉलोनाइजर है, को भी पूर्व ईओ गिरीश वर्मा को भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने में मदद करने के आरोप में जून 2023 में गिरफ्तार किया गया था।  उन्होंने आगे बताया कि पवन कुमार शर्मा ने मानसा जिले की तहसील बरेटा के गांव खुडाल कलां तहसील बरेटा में 25000 मीट्रिक टन की क्षमता वाले 5 एकड़ जमीन पर स्थित एक ओपन प्लिंथ (भंडारण गोदाम) कृषि भूमि के रूप में बेच कर गिरीश वर्मा की बेनियमियों पर गैरकानूनी गतिविधियों में मदद की। उन्होंने कहा कि यह जमीन   पवन कुमार जो की एमसी जीरकपुर के क्षेत्र में रियल एस्टेट का कारोबार करता था, की ओर से कम कीमत पर पंजीकृत करवाई गई थी,  जहां गिरीश वर्मा लंबे समय तक ईओ के रूप में तैनात था और बदले में उसे अवैध लाभ दिए थे।

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