
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में सप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए आश्रम के अचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम खुशनसीब हैं कि हमें सदगुरुदेव चमन लाल जी महाराज के सानिध्य में योग सीखने का मौका मिला तथा सत्संग में उनकी शिक्षाओं को जानने का मौका मिला जिस पर चलकर हम अपने जीवन को सफल कर सकते हैं | उन्होंने कहा कि सत्संग की महिमा अपरंपार है तथा सद्गुरु कृपा से ही सत्संग की प्राप्ति होती है | उन्होंने कहा कि सदगुरुदेव चमन लाल जी महाराज कहां करते थे कि ईश्वर गुरु के रूप में हमारा उद्धार करने आए हैं | हमें यह पहचानना है कि हम क्या थे और हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है ‘ उन्होंने कहा कि हमारा शरीर मिट्टी के घड़े की तरह है जो एक ठोकर लगने से बिखर जाएगा | यह बिगड़ता रहता है | इसके अंदर एक मन है जो हर समय भटकता रहता है | जागते हुए ही नहीं बल्कि सोए हुए भी यह कहीं भी भाग जाता है | क्या हम इसे रोक सकते हैं | इसकी कोई सीमा नहीं है| यह इतना शक्तिशाली है कि हर सीमा को तोड़कर कहीं भी जा सकता है | यही हमारे दुखों का कारण है| एक हमारी बुद्धि है जो जरा सी बात पर भटक जाती है | प्रभु जी योग की शिक्षाएं लाए हैं | हठयोग द्वारा हम शरीर को पूरी तरह से ठीक रख सकते हैं |

ज्ञान समाधि लाए हैं जिसके सहारे हम मन को काबू कर सकते हैं | भटकती बुद्धि को स्थिर कर सकते हैं | लेकिन दुख की बात है कि हम इसका लाभ नहीं उठा रहे | अगर उठाते तो आज हमारी स्थिति ऐसी ना होती|उन्होंने कहा कि हमारे भीतर एक चालाक चौकड़ी है जो हमें अपना मित्र बताती है | लेकिन वास्तव में वह हमारी शत्रु है | उन्होंने कहा कि इसमें एक सत्यान है| हम योग करना चाहते हैं तो वह हमें रोक देती है| वास्तव में वह हमारी शत्रु है हमें इससे बचना है | क्योंकि रोज योग करने वाला कभी बीमार नहीं होता | उन्होंने कहा कि शरीर में बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं | एक नेति के द्वारा हम बहुत से रोगों को रोक सकते हैं| संशय हमारा दूसरा शत्रु है जो हमें हमेशा भ्रम में रखता है कि जब एक गोली खाने से रोग ठीक हो सकता है तो फिर लंबे समय तक योग करने का क्या फायदा | इसमें हम क्यों समय खराब करें | लेकिन वह यह नहीं जानता कि गोली खाने से रोग को दबाया जा सकता है जबकि योग करने से रोक को मिटाया जा सकता है| उन्होंने कहा कि हमारा तीसरा शत्रु प्रमाद है | हम गुरु की बातों पर यकीन नहीं करते | बाद में हमें पश्चाताप करना पड़ता है | इसी तरह आलस्य हमारा चौथा शत्रु है | हम योग करना भी चाहते हैं तो हमें करने नहीं देता| हम योग आश्रम में जाकर गुरु की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहते हैं, उन्हें सुनना चाहते हैं, उन्हें धारण करना चाहते हैं लेकिन आलस हमें योगाश्रम पहुंचने ही नहीं देता | इस मौके पर भक्तों ने प्रभु भक्ति के भजन गाकर सबको भावविभोर कर दिया|











