
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-रजनीश शर्मा। ”कोई मिट गया चमन के लिए, कोई मिट गया रत्न के लिए।
मगर पूजा उसकी हुई है सदा, जिसने अपनी हस्ती मिटा दी वतन के लिए।।”
मणिपुर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने और राज्य में दंगा फैलाने की धमकी देने वाले विद्रोही तत्वों के साथ मुठभेड़ में, एनके हरि सिंह शहीद हो गए। स्वर्गीय एनके हरि सिंह की 58वी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। आइए इस मौके पर शहीद स्वर्गीय एनके हरि सिंह से जुड़ीं कुछ खास बातें जानते हैं…

परिचय
एनके हरि सिंह गांव भटेर, डाकघर ऊटपुर, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश का जन्म 31 मार्च 1935 को हुआ था। उनकी पत्नी का नाम कृष्णी देवी है। शहीद कांस्टेबल हरि सिंह को मणिपुर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने और राज्य में दंगा फैलाने की धमकी देने वाले विद्रोही तत्वों से निपटने के लिए 1″ बटालियन में तैनात किया गया था।
एनके हरि सिंह को वीरता के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया है। 27 सितंबर 1966 को शत्रुओं के साथ मुठभेड़ में, एनके हरि सिंह ने मैतेई विद्रोहियों के साथ एक मुठभेड़ में गंभीर शत्रुता का सामना करते हुए अदम्य वीरता और अनुकरणीय साहस का परिचय दिया और कर्तव्य की पंक्ति में सर्वोच्च बलिदान दिया। वीरता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के इस असाधारण कार्य के लिए कांस्टेबल हरि सिंह को मरणोपरांत वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।












